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पंजाब के मुख्यमंत्री केवल चुटकुले सुनाकर टाइम पास कर रहे हैं: नायब सिंह सैनी

पंजाब के मुख्यमंत्री केवल चुटकुले सुनाकर टाइम पास कर रहे हैं: नायब सिंह सैनी

 

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने पंजाब के मुख्यमंत्री से पूछा-महिलाओं व युवाओं से किए वादों का क्या हुआ

 

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने पटियाला के घनौर कस्बे में आयोजित तीज महोत्सव में पंजाब की मातृशक्ति को दिया आत्मनिर्भरता और नशामुक्ति का संदेश

 

कहा, आज पंजाब की महिलाएं बदलाव के लिए तत्पर

चंडीगढ़, 22 अगस्त- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान केवल चुटकुले सुनाकर अपना टाइम पास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवंत मान बताएं कि आम आदमी पार्टी द्वारा पिछले चुनाव के समय महिलाओं व युवाओं से किए वादों का क्या हुआ? आम आदमी पार्टी ने महिलाओं से हर महीने 1000 रुपये देने का वादा किया था और सरकार बने 5 साल होने को है और अब अगले चुनाव सिर पर आ गए हैं तब भी पंजाब के मुख्यमंत्री स्टेज से महिलाओं से पूछ रहे हैं कि बहन एक महीने के पैसे खाते में डालूं या दो महीने के या तीन महीने के? यह मजाक नहीं तो और क्या है? इसी प्रकार कानून-व्यवस्था की खराब हालत के चलते इंडस्ट्री पंजाब से पलायन कर रही है जिससे युवाओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा है, हताश-निराश युवा लगातार नशे के दलदल में धंसता जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी शनिवार को पंजाब के पटियाला जिले के घनौर कस्बे में आयोजित तीज महोत्सव में पंजाब की मातृशक्ति को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने महिलाओं को नारी सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया। उन्होंने महिलाओं को कोथलियां और सूट वितरित किए तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाली महिला कलाकारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर हरियाणा के पूर्व मंत्री श्री असीम गोयल, तीज महोत्सव के संयोजक श्री विकास शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पिछले चुनाव में तो आम आदमी पार्टी ने पंजाब के लोगों को गुमराह करके वोट ले लिए लेकिन इस बार पंजाब की जनता, विशेषकर माताएं-बहनें पूरी तरह से जागरूक हैं। इस बार महिलाएं पंजाब में बदलाव करने के लिए तत्पर हैं और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की नीतियों से प्रभावित होकर वे पंजाब में भाजपा की सरकार बनाकर पुनः हंसता-खेलता पंजाब बनाएंगी। पंजाब का युवा वर्ग भी अब यहां भाजपा सरकार बनाने का मन बना चुका है।

हरियाणा में महिलाओं के लिए चलाई गई योजनाएं गिनाईं:

श्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि हरियाणा में चुनाव से पहले हमने महिलाओं से 2100 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था और सरकार बनते ही सबसे पहले यह वादा निभाया। सरकार ने पहले ही बजट में इसके लिए 5000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया तथा अब 10 लाख महिलाओं को प्रतिमाह 2100 रुपये मिल रहे हैं। इसके अंतर्गत अब तक महिलाओं के खातों में 2000 करोड़ रुपये भिजवाए जा चुके हैं। इसी प्रकार सरकार 1.80 लाख रुपये सालाना आमदनी वाले परिवारों की रसोई में 500 रुपये में गैस सिलेंडर पहुंचा रही है। प्रदेश में स्वयं सहायता समूह चलाने वाली बहनों को मजबूत करने के लिए 20 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद की जा रही है। हरियाणा में स्वदेशी मेले लगाकर महिलाएं 4 दिन में 4 लाख से 45 लाख रुपये तक की आमदनी कर रही हैं। इसी प्रकार हरियाणा में गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक भोजन के लिए 6000 रुपये की राशि प्रदान की जा रही है। गरीब परिवारों को प्लाट, मकान और फ्लैट की चाबियां सौंपी जा रही हैं।

पंजाब में भी हरियाणा की योजनाएं लागू करने का संकल्प दोहराया:

उन्होंने कहा कि यही सब योजनाएं पंजाब में भाजपा सरकार बनने के बाद यहां के लोगों के लिए भी लागू की जाएंगी। हरियाणा की तरह पंजाब के किसानों की सभी फसलों को भी एमएसपी पर खरीदा जाएगा और आलू सहित अन्य सब्जियों व फलों के लिए भावांतर भरपाई योजना लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि पंजाब में भाजपा सरकार बनने के बाद यहां नशे का कारोबार करने वाले या तो यह काम छोड़ देंगे या पंजाब छोड़ देंगे। हरियाणा की तरह पंजाब में भी बिना पर्ची-बिना खर्ची युवाओं को नौकरियां दी जाएंगी और नौकरियों में चल रहे भ्रष्टाचार के जाल को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में हाल ही में एक्साइज इंस्पेक्टर की भर्ती में पूरी तरह से धांधली की गई तथा स्वास्थ्य विभाग में की गई भर्ती पर तो पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने स्टे का नोटिस तक जारी कर दिया है, क्योंकि इस भर्ती में प्रभावशाली लोगों की सिफारिशों पर नौकरी देकर गरीब युवाओं के साथ धोखा किया गया था।

तीज हरियाणा व पंजाब की सांझी संस्कृति का प्रतीक:

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने महिलाओं को तीज की बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह त्योहार केवल सावन की हरियाली और खुशियों का त्योहार नहीं, बल्कि सुहाग, सौभाग्य, प्रेम, श्रद्धा और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का पर्व है। यह पर्व हरियाणा और पंजाब की सांझी संस्कृति, बहनों-बेटियों के प्रेम तथा दोनों राज्यों की सांझी मिट्टी की उस आत्मा का उत्सव है, जो राज्य की सीमाओं से कहीं बड़ी है।

बहनों के मायके में आने जैसा महसूस कर रहा हूं:

उन्होंने कहा कि घनौर की धरती पर आयोजित यह समारोह उन्हें किसी औपचारिक कार्यक्रम के बजाय अपनी बहनों के मायके आने जैसा महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब की संस्कृति के सभी रंग यहां दिखाई दे रहे हैं-चुन्नियों के रंग, मेहंदी की खुशबू, गिद्धे और लोकगीतों की मिठास तथा सावन की झूलती पींघों में पंजाब की उमंग साफ नजर आ रही है।

बहनों के लिए कोथली की मिठास के साथ विश्वास का संदेश:

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज वे अपनी बहनों के बीच भाई बनकर उनके लिए कोथली लाए हैं। इस कोथली में केवल मिठाई नहीं, बल्कि रिश्तों की मिठास, सम्मान की खुशबू और बहनों की खुशहाली की दुआ भी है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मायके की चौखट पर भाई की परछाईं बहन के साथ खड़ी रहती है, उसी प्रकार वे भी हर सुख-दुख में अपनी बहनों के साथ खड़े रहेंगे।

बहन-बेटियों के लिए की सुख-समृद्धि व सम्मान की कामना:

मुख्यमंत्री ने सभी माताओं, बहनों और बेटियों को तीज महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तीज की पींघ जितनी ऊंची जाए, घनौर व पंजाब की बेटियों के सपने उससे भी ऊंचे हों, मेहंदी का रंग जितना गहरा हो, पंजाब और हरियाणा के रिश्तों का विश्वास उससे भी गहरा हो तथा सावन की धरती जितनी हरी हो, घनौर की खुशहाली और पंजाब की समृद्धि उससे भी अधिक हरी-भरी हो। उन्होंने कामना की कि तीज के पावन पर्व पर हर बहन-बेटी के जीवन में सुख, सम्मान, आत्मनिर्भरता और समृद्धि आए। मुख्यमंत्री ने तीज के अवसर पर सभी से संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि इस बार तीज का झूला केवल आंगन में न झूले, बल्कि बेटियों के सपनों, बहनों के हौसले, युवाओं की उम्मीदों, किसानों की मेहनत और खेतों की हरियाली में भी झूले।

क्रमांक-2026

हरियाणा में 8 एमसीएच विंग्स के निर्माण में तेजी, 1 नवंबर तक सभी एसएनसीयू को एमएनसीयू में बदलने के निर्देशमातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

चंडीगढ़, 22 अगस्त – हरियाणा राज्य मातृ, नवजात और शिशु स्वास्थ्य देखभाल को बड़ा बढ़ावा देने जा रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव, डॉ. सुमिता मिश्रा ने अधिकारियों को 8 मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग्स के निर्माण में तेजी लाने और 1 नवंबर तक सभी विशेष नवजात देखभाल इकाइयों (एसएनसीयू) को मदर-न्यूबॉर्न केयर यूनिट्स (एमएनसीयू) में बदलने के निर्देश दिए हैं।

डॉ. मिश्रा ने आज यहां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की राज्य स्वास्थ्य समिति की कार्यकारी समिति की 12वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि माताओं और नवजात शिशुओं को इलाज के दौरान एक साथ रखने, महिला-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाने, रेफरल सुविधाओं का विस्तार करने और गर्भावस्था की निगरानी व ट्रैकिंग को और तेज किया जाए।

एसएनसीयू को एमएनसीयू में बदला जाएगा, मां और बच्चे की देखभाल होगी एक साथ

बैठक का मुख्य बिंदु एसएनसीयू को एमएनसीयू में परिवर्तित करने का प्रस्ताव था। यह नया मॉडल मातृ और नवजात शिशु की देखभाल को एक एकीकृत प्रणाली के तहत लाएगा, जिससे माताओं को अपने नवजात शिशुओं के विशेष इलाज के दौरान उनके करीब रहने का अवसर मिलेगा। हरियाणा में वर्तमान में 29 एसएनसीयू, 62 नवजात स्थिरीकरण इकाइयां (एनबीएसयू) और 527 नवजात देखभाल कोने (एनबीसीसी) मौजूद हैं।

डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए कि योजनाबद्ध रूपांतरण को 1 नवंबर तक पूरा किया जाए, जिससे एक ऐसा देखभाल मॉडल मजबूत होगा जिसमें मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य और रिकवरी पर एक साथ ध्यान दिया जाता है।

डॉ. मिश्रा ने अधिकारियों को 8 मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य  विंग्स के निर्माण में तेजी लाने का निर्देश दिया, जिससे महिलाओं और बच्चों के लिए समर्पित बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा और एकीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की सरकारी अस्पतालों की क्षमता बढ़ेगी।

बैठक में प्रथम रेफरल इकाइयों के सुदृढ़ीकरण की भी समीक्षा की गई ताकि विशेष या आपातकालीन देखभाल की आवश्यकता वाली गर्भवती महिलाओं को बिना किसी अनावश्यक देरी के संदर्भित और इलाज प्रदान किया जा सके।

हरियाणा ने नामित एफआरयू की संख्या 40 से बढ़ाकर 100 कर दी है। राज्य ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रमुख संकेतकों में भी सुधार दर्ज किया है, जिसमें मातृ मृत्यु दर (एमएसआर ) 127 से घटकर 94 और नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 26 से घटकर 17 हो गई है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि 38 विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती की गई है, जिनमें बाल रोग, स्त्री रोग, मेडिसिन और एनेस्थीसिया जैसे प्रमुख विशेषज्ञ शामिल हैं।

महिला क्लीनिकों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा

डॉ. मिश्रा ने अधिकारियों को उनके कामकाज और सेवा वितरण में सुधार करने के निर्देश दिए।

इसका उद्देश्य इन महिला-केंद्रित सुविधाओं को अधिक जिम्मेदार और सुलभ बनाना है, जिससे महिलाएं अपने घर के पास आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त कर सकें। विभाग गर्भावस्था, प्रजनन स्वास्थ्य, मातृ देखभाल और प्रसवोत्तर सहायता को कवर करने वाली महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं की श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में काम करेगा।

सभी जिला अस्पतालों में बनेंगे बाल देखभाल केंद्र

 

डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए कि सभी जिला अस्पतालों में बाल देखभाल केंद्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में महिलाओं के अनुकूल माहौल बनाना है, विशेष रूप से महिला कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए जिन्हें काम करने या स्वास्थ्य सेवाएं लेने के दौरान बच्चों की देखभाल की आवश्यकता होती है।

चिकित्सा कर्मियों को मिलेगा जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण और सतत चिकित्सा शिक्षा

डॉ. मिश्रा ने अधिकारियों को जमीनी स्तर पर आशा  कार्यकर्ताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण उपाय शुरू करने के निर्देश दिए, जिनकी प्रभावशीलता का आकलन क्षेत्र-स्तरीय परिणामों के माध्यम से किया जाएगा।

गर्भवती महिलाओं, परिवारों और स्वास्थ्य प्रणाली के बीच अग्रिम पंक्ति की कड़ी के रूप में आशा कार्यकर्ताओं को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा, विशेष रूप से उच्च जोखिम वाली गर्भधारण की पहचान, समय पर रेफरल और फॉलो-अप देखभाल के लिए।

उन्होंने डॉक्टरों, नर्सों, रेडियोग्राफर और अन्य पैरा-मेडिकल स्टाफ की सभी श्रेणियों के लिए आवश्यकता आधारित और कौशल उन्नयन पर आधारित सतत चिकित्सा शिक्षा  के लिए एक वार्षिक कैलेंडर तैयार करने के भी निर्देश दिए।

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