धराली त्रासदी: मलबे में जिंदगी की तलाश, हाईटेक मशीनों का इंतजार
उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले के धराली क्षेत्र में आई भीषण आपदा ने पूरे राज्य को हिला दिया है। भारी बारिश और पहाड़ टूटने से लगभग 80 एकड़ क्षेत्र मलबे से भर गया है, जिसमें 100 से 150 लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत और बचाव कार्य ज़ोरों पर है, लेकिन चुनौती इतनी बड़ी है कि स्थानीय प्रशासन के पास उपलब्ध संसाधन पर्याप्त नहीं साबित हो रहे हैं।
मौके पर फिलहाल तीन जेसीबी मशीनें लगातार मलबा हटाने में लगी हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि मलबा बेहद गाढ़ा, पत्थरों और चट्टानों से भरा है, जिससे जेसीबी की रफ्तार धीमी पड़ रही है। कई जगहों पर मलबा 20-25 फीट तक ऊँचा है, और उसके नीचे घर, दुकानें, और सड़कें दब चुकी हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि राहत कार्य के लिए जरूरी हाईटेक मशीनें अभी तक मौके पर नहीं पहुंची हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, इन मशीनों को धराली तक पहुंचाने में अभी चार दिन और लगेंगे। पहाड़ी रास्तों के क्षतिग्रस्त होने, लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन के खतरे के कारण मशीनों की ढुलाई बेहद मुश्किल हो रही है। इन हाईटेक मशीनों के आने के बाद ही बड़े पैमाने पर मलबा हटाने और दबे लोगों को निकालने का काम तेज़ हो पाएगा।
स्थानीय लोग, SDRF (State Disaster Response Force), NDRF (National Disaster Response Force) और सेना के जवान मिलकर राहत कार्य में जुटे हुए हैं। राहत टीमों ने अब तक मलबे से कुछ शव बरामद किए हैं, लेकिन दबे हुए बाकी लोगों के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। बचावकर्मी हाथ से खुदाई करने और छोटे उपकरणों की मदद से रास्ता बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि किसी तरह जीवित बचे लोगों तक पहुंचा जा सके।
धराली के इस इलाक़े में सैकड़ों की संख्या में घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, हादसे के दिन अचानक पहाड़ से भारी मात्रा में मलबा और पत्थर नीचे आए, जिससे लोग संभलने का मौका ही नहीं पा सके। कई परिवार घरों के अंदर ही दब गए। घटना के बाद गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है, और लोग अपने परिजनों की तलाश में मलबे के पास डटे हुए हैं।
राज्य सरकार ने इस घटना को गंभीर आपदा घोषित कर दिया है और पीड़ित परिवारों के लिए मुआवज़े की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने हालात का जायजा लेने के लिए उच्च स्तरीय बैठक बुलाई और प्रभावित इलाके का हवाई सर्वेक्षण भी किया। उन्होंने कहा कि बचाव कार्य में किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी, और मशीनों को जल्द से जल्द पहुंचाने के लिए हर संभव उपाय किए जा रहे हैं।
हालांकि, मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे राहत कार्य में और कठिनाई आने की संभावना है। ऐसे में मलबे के खिसकने और नई घटनाओं का खतरा भी बना हुआ है।
धराली की यह त्रासदी हमें एक बार फिर याद दिलाती है कि पहाड़ी इलाकों में अनियंत्रित निर्माण, जलवायु परिवर्तन और मानसून की तीव्रता मिलकर किस तरह बड़े पैमाने पर तबाही ला सकते हैं। इस वक्त प्राथमिकता यही है कि दबे हुए लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जाए और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद पहुंचाई जाए।