Homeहरियाणाहरियाणा की प्रगति और जनता की खुशहाली हमारी साझा मंजिल : मुख्यमंत्री...

हरियाणा की प्रगति और जनता की खुशहाली हमारी साझा मंजिल : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी*

हरियाणा की प्रगति और जनता की खुशहाली हमारी साझा मंजिल : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी*

 

*कहा: राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हम सभी हरियाणा की जनता के प्रतिनिधि*

 

*विधानसभा की गरिमा, जनसंवाद और संवैधानिक मूल्यों को अपने आचरण में उतारने का किया आह्वान*

 

*संविधान पखवाड़े के तहत आयोजित जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को किया संबोधित*

चंडीगढ़, 2 नवंबर- मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक राहें और विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हरियाणा की प्रगति और प्रदेश के लोगों की खुशहाली सभी की साझा मंजिल है। हम सभी की पहचान इस बात से है कि हम हरियाणा की जनता के प्रतिनिधि हैं। जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे जनता की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं को समझते हुए प्रदेश के विकास में अपना योगदान दें।

मुख्यमंत्री सोमवार को पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में हरियाणा विधानसभा द्वारा संविधान पखवाड़े के तहत आयोजित जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे कर लिए हैं। हीरक जयंती के इस अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला की उपस्थिति से इसकी गरिमा बढ़ी है और संसदीय प्रक्रियाओं, सदन की मर्यादा तथा जनप्रतिनिधियों के दायित्वों पर उनका मार्गदर्शन सभी के लिए मूल्यवान है। उन्होंने कहा कि हीरक जयंती समारोह में देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु ने पधार कर हरियाणा की जनता को अपना आर्शीवाद दिया।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा की 60 वर्षों की विकास यात्रा केवल सड़कों, संस्थानों और उद्योगों के विस्तार की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें किसानों, श्रमिकों, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों की मेहनत भी शामिल है। खेतों की हरियाली से उद्योगों की ऊंचाइयों तक, गांवों की पगडंडियों से आधुनिक एक्सप्रेस-वे तक और अखाड़ों की मिट्टी से विश्व के खेल मंचों तक हरियाणा ने अपने परिश्रम, साहस और संकल्प से प्रगति के नए अध्याय लिखे हैं। प्रदेश की उपलब्धियों की नींव उन चर्चाओं, निर्णयों और कानूनों से भी पड़ी है, जिन्हें जनप्रतिनिधियों ने विधानसभा में आकार दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 नवंबर, 1966 को हरियाणा अस्तित्व में आया था और उस समय विधानसभा में 54 सदस्य थे। वर्ष 1967 में विधानसभा सीटों की संख्या 81 हुई और वर्ष 1977 में बढ़कर 90 हो गई। उन्होंने कहा कि इन सीटों में आज बढ़ोतरी की आवश्यकता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी हो सके और आम जनता को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं सुलभ हो सके।

उन्होंने कहा कि आज प्रदेश 15वीं विधानसभा के दौर में अपनी लोकतांत्रिक यात्रा को आगे बढ़ा रहा है। ये आंकड़े प्रतिनिधित्व के विस्तार और जनता की आकांक्षाओं के बढ़ते दायरे को दर्शाते हैं। उन्होंने बताया कि 6 दिसंबर, 1966 को हरियाणा विधानसभा की पहली बैठक हुई थी। उस समय संसाधन सीमित थे और शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई, बिजली, सड़क तथा प्रशासनिक व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना बड़ी चुनौती थी। उन्होंने उन सभी जनप्रतिनिधियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की, जिन्होंने इन परिस्थितियों में प्रदेश के भविष्य की मजबूत नींव रखने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि संविधान का सम्मान हमारे निर्णयों और आचरण में दिखाई देना चाहिए। संविधान की प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्श निहित हैं। जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि इन आदर्शों को शासन के व्यवहार में उतारें। जब पात्र नागरिक को बिना भेदभाव उसका अधिकार मिलता है, कमजोर व्यक्ति की सुनवाई होती है और समाज में परस्पर सम्मान बढ़ता है, तभी इन संवैधानिक मूल्यों को मजबूती मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा कानून बनाने, सार्वजनिक धन के उपयोग को स्वीकृति देने और सरकार को जवाबदेह बनाने का महत्वपूर्ण मंच है। सदन में उठाया गया सार्थक प्रश्न किसी गांव की समस्या को समाधान तक पहुंचा सकता है और किसी विधेयक पर दिया गया उपयोगी सुझाव लाखों नागरिकों का जीवन बेहतर बना सकता है। प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण, बजट चर्चा और समितियों का कार्य संसदीय व्यवस्था को जीवंत बनाते हैं। इन प्रक्रियाओं का प्रभावी उपयोग करने के लिए अध्ययन, तैयारी और जनता से निरंतर संपर्क आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि जवाबदेही शासन को मजबूत बनाती है। विपक्ष द्वारा उठाई गई जनहित की बात को गंभीरता से सुनना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। इसी प्रकार आलोचना के साथ व्यावहारिक सुझाव देना भी सार्वजनिक जीवन की बड़ी सेवा है। सदन में तीखी बहस हो सकती है, लेकिन भाषा की गरिमा बनी रहनी चाहिए। जनप्रतिनिधियों को तर्कों से एक-दूसरे के विचारों को चुनौती देनी चाहिए और अपने आचरण से लोकतंत्र तथा संविधान के प्रति जनता का विश्वास बढ़ाना चाहिए।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज डिजिटल माध्यमों से नागरिक जनप्रतिनिधियों के शब्दों और व्यवहार को तुरंत देखते हैं। विशेष रूप से युवा पीढ़ी उनसे सीखती है कि सार्वजनिक जीवन में असहमति कैसे व्यक्त की जाती है। इसलिए तथ्यों की पुष्टि करना, व्यक्तिगत आक्षेप से बचना और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदार भाषा अपनाना आवश्यक है। चुनाव समाप्त होने के बाद जनप्रतिनिधि अपने पूरे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान पखवाड़े की सार्थकता तभी बढ़ेगी, जब इसकी चर्चा सभागारों से निकलकर गांवों, विद्यालयों और बस्तियों तक पहुंचेगी। नागरिकों को सरल भाषा में विधानसभा की कार्यप्रणाली, कानून बनने की प्रक्रिया, बजट की प्राथमिकताओं और जनसमस्याओं को उठाने के तरीकों की जानकारी दी जानी चाहिए। लोगों को अपने अधिकारों के साथ मौलिक कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक करना होगा। सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा, महिलाओं का सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए।

उन्होंने वर्तमान और पूर्व विधायकों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्रों में युवाओं के साथ संविधान संवाद आयोजित करें। विद्यालयों और महाविद्यालयों में युवा संसद, संविधान की प्रस्तावना का वाचन तथा स्थानीय समस्याओं पर विचार-विमर्श जैसे प्रयास किए जाने चाहिए। इससे विद्यार्थियों को विधानसभा की कार्यप्रणाली और संविधान में निहित मूल्यों को समझने का अवसर मिलेगा तथा लोकतंत्र के प्रति उनका विश्वास बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित हरियाणा के निर्माण में जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। किसी क्षेत्र की आवश्यकताओं को वहां रहने वाले लोग सबसे अच्छी तरह समझते हैं। इसलिए विकास की प्राथमिकताएं तय करते समय महिलाओं, किसानों, श्रमिकों, युवाओं, उद्यमियों और वंचित वर्गों की आवाज सुनी जानी चाहिए। जनप्रतिनिधि सरकार और समाज के बीच संवाद का सशक्त माध्यम बनें। जब योजना बनाने में नागरिक सहभागी होता है, तो उसके क्रियान्वयन और सार्वजनिक संसाधनों की रक्षा के प्रति उसका जुड़ाव भी बढ़ता है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 के विकसित भारत में हरियाणा की भूमिका अभी से तैयार करनी होगी। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, रोजगार, आधुनिक कृषि और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाने के साथ जल संरक्षण, स्वच्छ पर्यावरण और संतुलित शहरी विकास पर गंभीरता से काम करना होगा। नई तकनीक के अवसर प्रत्येक वर्ग तक पहुंचने चाहिए और विकास का लाभ गांव तथा शहर दोनों को मिलना चाहिए। समृद्धि के साथ सामाजिक विश्वास और नागरिक गरिमा भी बढ़नी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी विरासत ऐसा हरियाणा होना चाहिए, जहां सभी के लिए अवसर हों, प्रत्येक नागरिक को सम्मान मिले और लोकतंत्र में जनता का विश्वास निरंतर मजबूत हो। आने वाली पीढ़ियां हमसे पूछेंगी कि जब हमारे पास निर्णय लेने का अवसर था, तब हमने उनके लिए क्या किया। इसका जवाब हमारे काम में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे सदन की गरिमा बढ़ाएंगे, जनसंवाद मजबूत करेंगे और संवैधानिक मूल्यों को अपने आचरण में उतारेंगे।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments