गुरु रविदास जी की शिक्षाओं को अपनाने का समय: मनीष सिसोदिया
प्रियंका ठाकुर | 24 घंटे न्यूज़
Ludhiana स्थित CT University में सोमवार को पंजाब सरकार की ओर से गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मनीष सिसोदिया ने युवाओं से सामाजिक और आर्थिक असमानता के खिलाफ आवाज उठाने तथा Guru Ravidas की शिक्षाओं को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी ने समानता, भाईचारे और सामाजिक न्याय का संदेश दिया था, जिसे आज के समाज में लागू करने की आवश्यकता है।
सिसोदिया ने कहा कि देश में शिक्षा और अर्थव्यवस्था सहित कई क्षेत्रों में अभी भी असमानता और भेदभाव मौजूद है। आर्थिक विषमता पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि देश की बड़ी संपत्ति सीमित लोगों के हाथों में केंद्रित है, जबकि बड़ी आबादी के पास बहुत कम संसाधन हैं। उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों की जरूरत पर भी जोर दिया।
उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा समाज बनाने की दिशा में काम करना चाहिए जो भेदभाव, अन्याय और सामाजिक विभाजन से मुक्त हो। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व में पंजाब सरकार पूरे वर्ष गुरु रविदास जी के संदेश को घर-घर तक पहुंचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
इस अवसर पर मनीष सिसोदिया ने युवाओं के लिए एक मिस्ड कॉल अभियान (9090029090) भी शुरू किया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है ताकि हर नागरिक को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
कार्यक्रम में पंजाब के पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के सलाहकार Deepak Bali ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को गुरु रविदास जी के जीवन, शिक्षाओं और दर्शन से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
इस मौके पर श्री खुरलगढ़ साहिब के संत केवल सिंह ने भी युवाओं से गुरु जी की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने की अपील की। कार्यक्रम में सीटी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति चरणजीत सिंह चन्नी, प्रोफेसर कुलाधिपति डॉ. मनबीर सिंह, उपाध्यक्ष हरप्रीत सिंह और एसडीएम कुलदीप बावा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


