भारत टॉप 15 एफडीआई निवेश देशों की सूची से बाहर, हरपाल सिंह चीमा ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना
By Priyanka Thakur
चंडीगढ़, 28 मई:
पंजाब के वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema ने कहा कि विदेशी निवेशकों के भरोसे से जुड़ी दुनिया की टॉप 15 अर्थव्यवस्थाओं की सूची से भारत का बाहर होना भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति देश में निवेशकों के घटते भरोसे और बढ़ती नीति अनिश्चितता को दर्शाती है।
हरपाल सिंह चीमा ने ताजा एफडीआई कॉन्फिडेंस इंडेक्स रैंकिंग का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2016 में भारत दुनिया के टॉप 10 निवेश गंतव्यों में शामिल था, लेकिन अब 2026 में देश टॉप 15 सूची से भी बाहर हो गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के “अमृत काल” और आर्थिक विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किए गए अपने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत कभी विदेशी निवेश के लिए सबसे पसंदीदा देशों में गिना जाता था, लेकिन अब वैश्विक निवेशकों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है। चीमा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार वास्तविक आर्थिक सुधारों के बजाय केवल प्रचार और सुर्खियां बटोरने वाली राजनीति पर ध्यान दे रही है।
वित्त मंत्री ने कहा कि विदेशी निवेशक अब दूसरे देशों की ओर रुख कर रहे हैं क्योंकि भारत में निवेश का माहौल कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि निवेश समझौते केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं, जबकि उद्योगों और निवेशकों को स्थिर और स्पष्ट नीतियां नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि बढ़ती नीति अनिश्चितता और कमजोर औद्योगिक माहौल के कारण भारत की वैश्विक निवेश अपील कम होती जा रही है।
Reserve Bank of India और अन्य आर्थिक संस्थाओं का उल्लेख करते हुए चीमा ने कहा कि केंद्र सरकार आर्थिक चुनौतियों को स्वीकार करने के बजाय वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और तेल की बढ़ती कीमतों से आम जनता परेशान है, जबकि सरकार निवेश और आर्थिक विकास के नाम पर केवल घोषणाएं कर रही है।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भारत को पारदर्शी आर्थिक प्रशासन, स्थिर नीतियों, रोजगार सृजन और निवेशकों का भरोसा मजबूत करने वाली योजनाओं की जरूरत है। उन्होंने कहा कि केवल बड़े-बड़े दावे और प्रचार अभियान देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि यूएई, सऊदी अरब और दक्षिण कोरिया जैसे देश वैश्विक निवेश आकर्षित करने में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि भारत अपनी स्थिति खोता जा रहा है। चीमा ने केंद्र सरकार से स्पष्ट आर्थिक रोडमैप पेश करने और निवेशकों का भरोसा दोबारा जीतने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।


