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तस्करी और जालसाजी पर शिकंजा कसने के लिए पंजाब पुलिस का बड़ा कदम, फिक्की कैस्केड के साथ आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम

तस्करी और जालसाजी से निपटने के लिए पंजाब पुलिस और फिक्की कैस्केड का संयुक्त अभियान, अधिकारियों को दिया विशेष प्रशिक्षण

चंडीगढ़/जालंधर, 13 जून: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की संगठित आर्थिक अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सोच को आगे बढ़ाते हुए पंजाब पुलिस ने फिक्की कैस्केड (कमेटी अगेंस्ट स्मगलिंग एंड काउंटरफिटिंग एक्टिविटीज डेस्ट्रॉयिंग द इकोनॉमी) के सहयोग से पुलिस अधिकारियों के लिए एक विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों को तस्करी और नकली सामान के कारोबार से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आवश्यक कानूनी और प्रक्रियात्मक जानकारी प्रदान करना था।

महाराजा रणजीत सिंह पंजाब पुलिस अकादमी, फिल्लौर में आयोजित इस आधे दिन के प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्यभर से 60 पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। यह सेमिनार पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पंजाब गौरव यादव के निर्देशों पर आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन विशेष पुलिस महानिदेशक (यातायात एवं सड़क सुरक्षा) अमरदीप सिंह राय ने किया। उन्होंने कहा कि तस्करी और नकली सामान का अवैध कारोबार लगातार जटिल होता जा रहा है, जिससे वैध व्यवसायों, सरकारी राजस्व और उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने इस चुनौती से निपटने के लिए प्रभावी और त्वरित प्रवर्तन कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।

पंजाब के अतिरिक्त सचिव (गृह मामले) अंकुरजीत सिंह ने भी अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अवैध व्यापार के बदलते स्वरूप को देखते हुए पुलिस की सक्रिय भूमिका अत्यंत आवश्यक है। वहीं जेल विभाग के सचिव मोहम्मद तैयब ने आर्थिक अपराधों के खिलाफ निरंतर सतर्कता और प्रभावी कानून प्रवर्तन की जरूरत पर जोर दिया।

फिक्की कैस्केड के सलाहकार और दिल्ली के पूर्व विशेष पुलिस आयुक्त दीप चंद ने नकली उत्पादों और तस्करी के कारण देश की अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को ट्रेडमार्क अधिनियम 1999, कॉपीराइट अधिनियम 1957 और भारतीय न्याय संहिता 2023 के प्रभावी उपयोग संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी।

उद्योग जगत का पक्ष रखते हुए आईटीसी के कॉर्पोरेट मामलों के उपाध्यक्ष आशीष पाल ने नकली सिगरेटों और तस्करी के बढ़ते नेटवर्क पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे सरकार को भारी राजस्व हानि होती है और उपभोक्ताओं का विश्वास भी प्रभावित होता है। उन्होंने यह भी बताया कि कई मामलों में तस्करी से अर्जित धन का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण में किया जाता है।

दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता डॉ. ऋषि कुलश्रेष्ठ ने अधिकारियों को जांच और अभियोजन के दौरान अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मजबूत मामलों के निर्माण और दोषियों को सजा दिलाने के लिए कानूनी प्रावधानों का पूरी सावधानी से पालन करना आवश्यक है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस अधिकारियों की क्षमता को मजबूत बनाने और पंजाब में तस्करी एवं जालसाजी के नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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