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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्र सेवा, त्याग और सिद्धांतों का प्रेरणास्रोत : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी  

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्र सेवा, त्याग और सिद्धांतों का प्रेरणास्रोत : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

 

अंबाला की धरती का डॉ. श्यामा प्रसाद के जीवन से ऐतिहासिक संबंध

 

मुख्यमंत्री ने की घोषणा: साइंस सेंटर का नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर होगा, प्रतिमा भी होगी स्थापित

 

मेक इन इंडिया, नई शिक्षा नीति और आत्मनिर्भर भारत जैसे अनेक निर्णय डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवादी विजन को आगे बढ़ाने वाले कदम: केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा

 

चंडीगढ़, 6 जुलाई- मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि महान स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्र सेवा, त्याग और सिद्धांतों का प्रतीक है। उनकी जयंती केवल उन्हें स्मरण करने का अवसर नहीं, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलने तथा नई पीढ़ी को उनके जीवन मूल्यों, आदर्शों और सिद्धांतों से प्रेरणा लेने का अवसर है।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी अंबाला में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी 125 स्मरण पक्ष कार्यक्रम के दौरान संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने भी शिरकत की। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अंबाला में 85 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले साइंस सेंटर का नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखा जाएगा, साथ ही निर्माणाधीन शहीद स्मारक के नजदीक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। इससे पहले मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा, प्रदेशाध्यक्ष डॉ अर्चना गुप्ता ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी, संसदीय बोर्ड की सदस्य श्रीमती सुधा यादव ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले वर्ष से जुलाई 2027 तक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का दो वर्षीय जयंती समारोह मनाया जा रहा है। यह आयोजन उनके विचारों को देश के जन-जन और घर-घर तक पहुंचाने का महायज्ञ है तथा राष्ट्र की ओर से उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी के व्यक्तित्व में ज्ञान, कर्म और राष्ट्रभक्ति की त्रिवेणी का अद्भुत संगम दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में जन्मे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को विद्वता और राष्ट्र सेवा की भावना विरासत में मिली थी। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी बंगाल के प्रसिद्ध शिक्षाविद थे। मात्र 33 वर्ष की आयु में डॉ. मुखर्जी कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति बने। बाद में वे संविधान सभा के प्रभावशाली सदस्यों में शामिल रहे तथा स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री का दायित्व भी संभाला।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का राजनीतिक जीवन सत्ता की इच्छा से नहीं, बल्कि सेवा और सिद्धांतों के प्रति समर्पित था। जब देशहित और सिद्धांतों का प्रश्न आया तो उन्होंने 19 अप्रैल 1950 को केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने तत्कालीन सरसंघचालक श्री गुरु गोलवलकर से मुलाकात की और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के साथ मिलकर भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जो आज भारतीय जनता पार्टी का आधार है।

उन्होंने कहा कि अंबाला की धरती का डॉ. मुखर्जी के जीवन से ऐतिहासिक संबंध है। 8 मई 1953 को जब वे जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना हुए तो अंबाला स्टेशन पहुंचकर उन्होंने तत्कालीन जम्मू-कश्मीर के प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला को संदेश भेजा कि वे बिना परमिट जम्मू आ रहे हैं और वहां के हालात का अवलोकन कर शांति स्थापित करना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रावी नदी के पुल पर उन्हें जम्मू-कश्मीर में प्रवेश से रोकने का सरकारी आदेश दिया गया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे राज्य में प्रवेश करने के लिए कटिबद्ध हैं। इसके बाद उन्होंने बिना परमिट जम्मू-कश्मीर में प्रवेश किया, जहां उन्हें गिरफ्तार कर श्रीनगर के निकट नजरबंद कर दिया गया। नजरबंदी के दौरान उनका निधन हो गया। उन्होंने कहा कि यह बलिदान भारत की एकता और अखंडता के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने “एक राष्ट्र में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे” का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि आज यह गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डॉ. मुखर्जी के उस संकल्प को पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि उनकी जयंती हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि हम मिलकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के दिखाए मार्ग पर चलते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम कर रहे है।

 

 मेक इन इंडिया, नई शिक्षा नीति और आत्मनिर्भर भारत जैसे अनेक निर्णय डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवादी विजन को आगे बढ़ाने वाले कदम: केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के प्रणेता थे। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन को राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए समर्पित किया। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उनकी विचारधारा को धरातल पर उतारा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना कर देश को एक मजबूत वैचारिक विकल्प दिया। आज उसी विचारधारा के आधार पर भारतीय जनता पार्टी विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) देश के अधिकांश हिस्से में जनसेवा कर रहा है। श्री नड्डा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” का नारा दिया था। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाकर उनके संकल्प को पूरा किया गया।

उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने पूर्वी पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात कही थी। प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) लागू कर उनकी इस सोच को भी साकार किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि “मेक इन इंडिया”, रक्षा विनिर्माण, सेमीकंडक्टर निर्माण, नई शिक्षा नीति और आत्मनिर्भर भारत जैसे अनेक निर्णय डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवादी विजन को आगे बढ़ाने वाले कदम हैं। नई शिक्षा नीति शिक्षा को सुलभ, किफायती, लचीला और मातृभाषा आधारित बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है।

हरियाणा के विकास रफ्तार की तारीफ की:

केंद्रीय मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने प्रदेश की डबल इंजन सरकार और प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की तारीफ करते हुए विकास कार्यो को भी गिनवाया। उन्होंने हरियाणा में केंद्र सरकार की विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यमुनानगर में दीनबंधु छोटू राम तापीय विद्युत संयंत्र, द्वारका एक्सप्रेसवे, रेवाड़ी बाईपास, राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार, रेल परियोजनाएं तथा खरखौदा में मारुति सुजुकी का विशाल संयंत्र प्रदेश के विकास को नई गति दे रहे हैं।

 श्री नड्डा ने कहा कि हरियाणा में पारदर्शी भर्ती व्यवस्था लागू की गई है और बिना पर्ची-बिना खर्ची के हजारों युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं। महिलाओं के कल्याण, स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत ढांचे के विकास में भी राज्य सरकार उल्लेखनीय कार्य कर रही है। उन्होंने लाडो लक्ष्मी योजना, जरूरतमंदों को 500 रुपये में मिलने वाले गैस सिलेंडर के साथ—साथ किसानों की एमएसपी पर खरीदी जा रही फसलों का भी किया। श्री नड्डा ने कहा कि प्रदेश में एम्स और कैंसर उपचार सुविधाओं का विस्तार स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव लेकर आया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने पश्चिम बंगाल को भारत का हिस्सा बनाए रखने के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया था। यदि उन्होंने उस समय आंदोलन नहीं किया होता तो आज पश्चिम बंगाल का अस्तित्व वर्तमान स्वरूप में संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि प्रत्येक नागरिक विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के संकल्प को पूरा करने में अपना योगदान दे तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर कार्य करे। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा अंबाला स्थित साइंस सेंटर का नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखने तथा उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा का स्वागत किया और इसके लिए मुख्यमंत्री को बधाई दी।

डॉ. श्यामा प्रसाद औद्योगिक क्रांति के अग्रदुत: प्रदेशाध्यक्ष डॉ अर्चना गुप्ता

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष डॉ अर्चना गुप्ता ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश की एकता के लिए त्याग दिया, देश को आत्मनिर्भरता का विचार उन्होंने ही दिया। उन्होंने कहा कि महान विभूति डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्वतंत्र भारत में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री बने थे। विपक्ष में होते हुए भी वे कर्तव्य और निष्ठा तथा ईमानदारी के परिपेक्ष के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने 4 प्रमुख बिंदुओं पर काम किया, जिनमें रेल का जाल, एयरपोर्ट, रक्षा उपकरण और परमाणु ऊर्जा शामिल थे। आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी उसी विजन के साथ काम कर रहे है।

इस मौके पर बीजेपी केंद्रीय संसदीय बोर्ड की सदस्य श्रीमती सुधा यादव, वरिष्ठ नेता श्रीमती बन्तो कटारिया, प्रदेश संयोजक श्री संदीप जोशी, जिलाध्यक्ष श्री मनदीप राणा, पूर्व मंत्री श्री असीम गोयल, मेयर अक्षीता सैनी, पूर्व विधायक श्री पवन सैनी, श्रीमती संतोष सारवान सहित कई गणमान्य मौजूद थे।

क्रमांक-2026

हरियाणा में अनुसंधान तंत्र का होगा विस्तार, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मिलेगा बढ़ावा

एसजेएचआईएफएम को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शोध केंद्र से जोड़ने की कवायद

चंडीगढ़, 6 जुलाई-हरियाणा में नीति आधारित अनुसंधान तथा साक्ष्य-आधारित सुशासन को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान (एसजेएचआईएफएम) को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शोध केंद्र के रूप में मान्यता देने की कवायद हो रही है। इस पहल का उद्देश्य राज्य की दीर्घकालिक विकास के विजन तथा ‘विकसित हरियाणा-2047’ के लक्ष्य को बल देने के लिए एक सशक्त अनुसंधान तंत्र विकसित करना है।

मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आज यहां हुई एक बैठक में इस आशय के एक प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके तहत एसजेएचआईएफएम को पीएचडी शोध कार्यक्रम संचालित करने तथा नीति अनुसंधान, वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल गवर्नेंस एवं क्षमता निर्माण के क्षेत्र में एक बहु-विषयक उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। इस पहल से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में दीर्घकालिक अनुसंधान को संस्थागत स्वरूप मिलेगा तथा सरकार में साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रक्रिया को और मजबूती मिलेगी।

उच्चतर शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री ए.के. सिंह ने बताया कि एसजेएचआईएफएम को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से संबद्ध किए जाने पर संस्थान विश्वविद्यालय अधिनियम, विश्वविद्यालय की विधियों तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्धारित मानकों के अनुरूप देश के अन्य प्रतिष्ठित शोध संस्थानों की तर्ज पर पीएच.डी. कार्यक्रम संचालित कर सकेगा। उन्होंने बताया कि एसजेएचआईएफएम पहले से ही परिणाम-आधारित अनुसंधान, लोक नीति अध्ययन, वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल गवर्नेंस तथा क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में कार्य कर रहा है और इस संबद्धता से उसकी शैक्षणिक एवं अनुसंधान क्षमता को और मजबूती मिलेगी।

बैठक में एसजेएचआईएफएम में टीम लीड तथा स्टेट प्रोग्राम ऑफिसर के स्वीकृत पदों के लिए पात्रता मानदंडों में संशोधन के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। संशोधित मानदंडों का उद्देश्य पीएच.डी. धारकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों तथा विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और स्वायत्त संस्थाओं के विशेषज्ञों सहित अधिक योग्य एवं अनुभवी प्रतिभाओं को आकर्षित करना है। इससे प्रस्तावित पीएचडी. कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त मात्रा में पात्र शोध पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) भी उपलब्ध हो सकेंगे।

इस पहल से राज्य की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप हरियाणा के अनुसंधान तंत्र को मजबूती मिलेगी तथा प्रभावी एवं साक्ष्य-आधारित शासन के लिए गुणवत्तापूर्ण नीति सम्बन्धी सुझाव उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

बैठक में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.एन. सचदेवा, उच्चतर शिक्षा विभाग के महानिदेशक श्री एस. नारायणन, स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान, पंचकूला के सलाहकार प्रो. आर.एस. राठौर तथा उच्चतर शिक्षा विभाग एवं एसजेएचआईएफएम के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

क्रमांक-2026

साइबर अपराध पर सख्ती बढ़ी, हरियाणा देश के अग्रणी राज्यों में शुमार

छह माह में 14 हजार से अधिक अवैध ऑनलाइन सामग्री हटाई, 3,947 साइबर अपराधी गिरफ्तार

एमआरएम के माध्यम से रिफंड रेट राष्ट्रीय औसत से आठ गुना ज्यादा

चंडीगढ़, 6 जुलाई-हरियाणा ने साइबर अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) के माध्यम से साइबर ठगी के मामलों में 31 प्रतिशत धन वापसी (फंड रेस्टोरेशन) सुनिश्चित की है। यह राष्ट्रीय औसत 3.85 प्रतिशत से आठ गुना अधिक है। इसके साथ ही वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में 14,000 से अधिक अवैध ऑनलाइन सामग्री हटाई गई और 3,947 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि पिछले डेढ़ साल में साइबर हॉटस्पॉट नूंह से 927 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी की गई। जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच 9,100 पुलिस कर्मियों को साइबर जांच का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया।

यह जानकारी आज यहां मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई प्रगति समीक्षा बैठक में दी गई।

बैठक में मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र के लिए आवश्यक मानव संसाधन की स्वीकृति में तेजी लाने, प्रौद्योगिकी आधारित पुलिसिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित साइबर निगरानी तथा संस्थागत क्षमता को और सुदृढ़ करने के साथ ही विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा अभियोजन और पीड़ित सहायता व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए, ताकि बदलते डिजिटल खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

बैठक में बताया गया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) द्वारा विकसित मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के तहत हरियाणा ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। जहां देशभर में 1,79,203 मामलों में 6,906 रेस्टोरेशन आदेश जारी हुए और रिफंड रेट 3.85 प्रतिशत रहा, वहीं हरियाणा में 7,316 मामलों में 2,241 रिस्टोरेशन आदेश जारी कर 31 प्रतिशत धन वापसी सुनिश्चित की गई।

पुलिस अधीक्षक (साइबर) श्री मयंक गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2023 में पंचकूला में स्थापित राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र (एस4सी) की क्षमताओं का वर्ष 2026 में व्यापक विस्तार किया गया है। साइबर धोखाधड़ी शिकायत प्रबंधन, बैंक समन्वय, म्यूल अकाउंट, जांच निगरानी, मोबाइल एवं यूआरएल ब्लॉकिंग जैसी मौजूदा इकाइयों के अलावा अब एआई इंटीग्रेशन सेल, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग यूनिट, ओसीडब्ल्यूसी यूनिट, क्रिएटिव अवेयरनेस यूनिट तथा सीक्रेट सेल भी स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण, नीति, अनुसंधान एवं विकास, डार्क वेब जांच तथा वर्चुअल डिजिटल एसेट से संबंधित विशेष प्रकोष्ठ स्थापित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि 25 जून, 2026 से हरियाणा में ई-जीरो एफआईआर सुविधा लागू कर दी गई है। इसके तहत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर प्राप्त एक लाख रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी संबंधी शिकायतें स्वतः इलेक्ट्रॉनिक जीरो एफआईआर में परिवर्तित होकर संबंधित साइबर पुलिस थानों को चली जाती हैं, जिससे ऐसे मामलों में त्वरित पंजीकरण और जांच सुनिश्चित हो रही है।

बैठक में बताया गया कि सहयोग पोर्टल के माध्यम से जनवरी से जून 2026 के दौरान 14,139 अवैध ऑनलाइन सामग्री हटाई गई, जबकि पूरे वर्ष 2025 में यह संख्या 5,169 थी। हटाई गई सामग्री में फिशिंग वेबसाइट, फर्जी विज्ञापन, धोखाधड़ी से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट, फिशिंग गूगल विज्ञापन तथा बिना सहमति साझा की गई निजी आपत्तिजनक सामग्री शामिल है।

बैठक में साइबर अपराध के हॉटस्पॉट नूंह में की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच हरियाणा पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर 473 एफआईआर दर्ज कीं, 927 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया, 751 मोबाइल फोन तथा 1,442 सिम कार्ड जब्त किए। इसके अतिरिक्त खुफिया अभियानों के तहत 43,354 मोबाइल नंबर तथा उनसे जुड़े 5,007 आईएमईआई को टावर डंप विश्लेषण, आईएमईआई लिंकिंग तथा प्रतिबिंब पोर्टल की सहायता से ब्लॉक कर संगठित साइबर अपराध नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया गया।

मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने शिकायत निवारण मॉड्यूल (जीआरएम) की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराध जांच के दौरान फ्रीज किए गए बैंक खातों से संबंधित 533 शिकायतों में से 410 का निपटान किया जा चुका है तथा समर्पित मॉनिटरिंग टीमों के माध्यम से सभी मामलों का 15 दिनों की निर्धारित समय-सीमा में समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।

बैठक में साइबर जांच क्षमता सुदृढ़ करने के लिए किए गए प्रयासों की भी जानकारी दी गई। वर्तमान में प्रदेश भर में 675 पुलिस कर्मी साइबर अपराध जांच में कार्यरत हैं। इसके अलावा, 3,742 अधिकारियों ने साइट्रेन पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जबकि जनवरी 2025 से मई 2026 के बीच हरियाणा पुलिस अकादमी, मधुबन में 5,390 पुलिस कर्मियों को विशेष ऑफलाइन प्रशिक्षण दिया गया। हरियाणा पुलिस के दो अधिकारी साइबर कमांडो के रूप में प्रशिक्षित किए गए हैं तथा 12 अन्य अधिकारी साइबर कमांडो प्रशिक्षण के अगले चरण के लिए पात्र घोषित किए गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि समन्वय पोर्टल पर हरियाणा ने अन्य राज्यों से प्राप्त 8,872 अनुरोधों में से 8,625 का निपटान कर 97 प्रतिशत से अधिक दक्षता दर्ज की है, जिससे राज्य देश के अग्रणी राज्यों में बना हुआ है।

बैठक में साइबर जागरूकता अभियान की भी समीक्षा की गई। जनवरी से जून 2026 के बीच हरियाणा पुलिस द्वारा स्कूलों, कॉलेजों, बस अड्डों, बाजारों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर 1,322 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनके माध्यम से लगभग 3.14 लाख नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाव के बारे में जागरूक किया गया। सोशल मीडिया के माध्यम से भी समय-समय पर साइबर धोखाधड़ी के नए तरीकों और उनसे बचाव संबंधी सलाह दी जा रही है।

बैठक में गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल, पुलिस महानिदेशक श्री अजय सिंघल तथा गृह विभाग की अतिरिक्त सचिव डॉ. वंदना दिसोदिया समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

क्रमांक-2026

हरियाणा की खेल नीति देश में सबसे अव्वल, प्रदेश के खिलाड़ी कर रहे हैं खेल क्षेत्र में देश का नाम रोशन

 

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा विकास कार्यों को मिल रही गति:  मंत्री कृष्ण कुमार बेदी

 

चंडीगढ़ 06 जुलाई-   हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री कृष्ण कुमार बेदी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार खेलों के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य कर रही है। राज्य की खेल नीति आज पूरे देश के लिए एक आदर्श बन चुकी है। खिलाड़ियों को सम्मान, बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाएं तथा पारदर्शी प्रोत्साहन देने की दिशा में सरकार ने अनेक प्रभावी कदम उठाए हैं, जिसके परिणामस्वरूप हरियाणा के खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रदेश और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मंत्री रविवार देर सांय जींद के गोसांई खेड़ा गांव में आयोजित सीजन वन कोर्पोरेट लिग के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए उपस्थित लोगों को सम्बोंधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने खेल कमेटी को 7 लाख 21 हजार रूपये की धन राशि देने की घोषणा भी की।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। खेल संरचना को मजबूत करने, खिलाड़ियों की छात्रवृत्ति, डाइट मनी, बीमा योजना तथा खेल उत्कृष्टता केंद्रों जैसी योजनाओं के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। उन्हों कहा कि सरकार का उद्देश्य हरियाणा को देश का अग्रणी खेल राज्य बनाए रखना और भविष्य के ओलंपिक सहित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए उत्कृष्ट खिलाड़ी तैयार करना है।  मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश में केवल खेल ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सिंचाई, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण तथा ग्रामीण विकास सहित प्रत्येक क्षेत्र में समान रूप से विकास कार्य किए जा रहे हैं। सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार और कौशल विकास के अवसर निरन्तर उपलब्ध करवा रही है। पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, आधुनिक शिक्षा व्यवस्था और डिजिटल सेवाओं के विस्तार से हरियाणा विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे सरकार की जनहितकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं तथा प्रदेश के समग्र विकास में सहभागी बनें।

 मंत्री ने कहा कि युवा पीढ़ी को नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रखने में खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। जो युवा नियमित रूप से खेल गतिविधियों से जुड़े रहते हैं, वे अनुशासन, सकारात्मक सोच और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाते हैं तथा नशे जैसी आदतों से स्वयं को दूर रखते हैं। राज्य सरकार युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने के साथ-साथ नशे के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चला रही है। सरकार द्वारा खिलाड़ियों को प्रोत्साहन, आधुनिक खेल सुविधाओं की उपलब्धता तथा विभिन्न स्तरों पर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक युवा खेलों से जुड़कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल उत्कृष्ट खिलाड़ी तैयार करना ही नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, जागरूक और नशामुक्त समाज का निर्माण करना भी है। इसी दिशा में विभिन्न विभागों के समन्वय से जागरूकता कार्यक्रम, रैलियां, कार्यशालाएं तथा जनसंपर्क अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने आमजन, अभिभावकों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों से भी आह्वान किया है कि वे युवाओं को खेलों से जोड़ने और नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

क्रमांक – 2026

प्रत्येक गर्भवती महिला को समय पर गुणवत्तापूर्ण और व्यापक मातृ स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी : आरती सिंह राव

 

स्वास्थ्य विभाग द्वारा 7 जुलाई से 22 जुलाई तक चलाया जाएगा ‘शून्य निवारणीय मातृ मृत्यु’ पखवाड़ा

 

चंडीगढ़, 6 जुलाई – हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि राज्य में प्रत्येक गर्भवती महिला को समय पर गुणवत्तापूर्ण और व्यापक मातृ स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी, उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सामुदायिक आउटरीच को तेज किया जाए  ताकि कोई भी गर्भवती महिला आवश्यक प्रसव पूर्व देखभाल या संस्थागत प्रसव सेवाओं से महरूम न रह जाए।

आरती सिंह राव ने बताया कि मातृ स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने और राज्य में मातृ मृत्यु दर को और कम करने की एक बड़ी पहल के तहत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हरियाणा ने प्रदेश के सभी जिलों में कल 7 जुलाई से 22 जुलाई तक ‘शून्य निवारणीय मातृ मृत्यु पखवाड़ा’ (Zero Preventable Maternal Death Pakhwada) मनाने का निर्णय लिया है। पखवाड़े भर चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक गर्भवती महिला को समय पर, गुणवत्तापूर्ण और व्यापक मातृ स्वास्थ्य सेवाएं मिलें ताकि कोई भी ऐसी मातृ मृत्यु न हो जिसे रोका जा सकता था। यह पहल माताओं के जीवन को सुरक्षित रखने और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के उच्चतम मानकों को प्राप्त करने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग सुलभ, न्यायसंगत और उच्च गुणवत्ता वाली मातृ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग है। स्वास्थ्य कर्मियों, चिकित्सा पेशेवरों, सहयोगी संगठनों और समुदाय के सामूहिक प्रयासों के माध्यम से, राज्य का लक्ष्य ‘शून्य निवारणीय मातृ मृत्यु पखवाड़ा’ को माताओं के जीवन की रक्षा करने और हरियाणा में प्रत्येक महिला के लिए सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बनाना है।

स्वास्थ्य मंत्री ने सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के सभी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं से पखवाड़े के दौरान निकट समन्वय में काम करने और प्रत्येक गर्भवती महिला के लिए समय पर, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने परिवारों से भी आग्रह किया है कि वे गर्भवती महिलाओं को नियमित प्रसव पूर्व जांच कराने, खतरे के संकेतों को जल्दी पहचानने और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करें।

एनएचएम, हरियाणा के मिशन-निदेशक डॉ. आर. एस. ढिल्लों ने इस अवसर पर उक्त पखवाड़ा की जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सभी सिविल सर्जनों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठकें की गई हैं। इन बैठकों के दौरान, सिविल सर्जनों को उच्च जोखिम वाली गर्भधारण (high-risk pregnancies) की पहचान करने, प्रसव पूर्व देखभाल सेवाओं को मजबूत करने, समय पर रेफरल सुनिश्चित करने, प्रथम रेफरल इकाइयों (FRUs) में चौबीसों घंटे तत्परता बनाए रखने और विशेष ध्यान देने की आवश्यकता वाली प्रत्येक गर्भवती महिला की बारीकी से निगरानी करने के लिए कड़े और सक्रिय कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को सख्त निगरानी रखने और किसी भी प्रसूति संबंधी आपात स्थिति (obstetric emergency) का तुरंत जवाब देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

डॉ. ढिल्लों ने आगे कहा कि उच्च जोखिम वाले गर्भधारण की पहचान और फॉलो-अप, समय पर रेफरल और परिवहन, रक्त और रक्त घटकों (blood components) की उपलब्धता, आपातकालीन प्रसूति देखभाल, विशेषज्ञ सेवाओं और लेबर रूम व प्रसूति सुविधाओं के निर्बाध संचालन पर विशेष जोर दिया गया है। स्वास्थ्य टीमों को आशा (ASHA), एएनएम (ANM), स्टाफ नर्सों और चिकित्सा अधिकारियों के माध्यम से सामुदायिक आउटरीच को तेज करने का निर्देश भी दिया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी गर्भवती महिला आवश्यक प्रसव पूर्व देखभाल या संस्थागत प्रसव (institutional delivery) सेवाओं से न चूके।

एनएचएम के निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव ने आगे जानकारी देते हुए कहा कि मातृ स्वास्थ्य को एक साझा जिम्मेदारी मानते हुए, स्वास्थ्य विभाग ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन  हरियाणा के राज्य अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (FOGSI) के हरियाणा चैप्टर के अध्यक्षों से सक्रिय सहयोग और भागीदारी मांगी है। इन संस्थाओं से अनुरोध किया गया है कि वे अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें और शून्य निवारणीय मातृ मृत्यु के उद्देश्य को प्राप्त करने में हर संभव सहायता प्रदान करें।”

डॉ. वीरेंद्र यादव ने आगे यह भी बताया कि आईएमए और फॉग्सी (FOGSI) से जुड़े सभी निजी डॉक्टर अपने-अपने अस्पतालों में प्रसव के 7 दिनों के भीतर सभी प्रसवित महिलाओं को “2 निःशुल्क प्रसवोत्तर जांच (Post-natal check-ups)” प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम गुणवत्तापूर्ण प्रसवोत्तर देखभाल जांच सुनिश्चित करेगा और किसी भी उच्च जोखिम वाले कारक को दूर करेगा जो स्तनपान कराने वाली माँ के जीवन के लिए घातक हो सकता है।

क्रमांक -2026

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