अमन अरोरा ने 300 सरकारी सेवाओं के लिए एकीकृत पोर्टल “डिजी पंजाब” लॉन्च किया*
• अगले दो महीनों में 800 से अधिक सरकारी सेवाएं इस पोर्टल पर जोड़ दी जाएंगी: अमन अरोरा
• सुशासन मेरा मिशन है, यह पोर्टल लोगों को बिना किसी परेशानी और सिफारिश के समय पर सेवाएं सुनिश्चित करेगा: अमन अरोरा
• प्रत्येक सेवा के लिए समय सीमा निर्धारित है, देरी होने पर संबंधित अधिकारी को परिणाम भुगतने होंगे: सुशासन एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री
• सरकार आपके पास आएगी, लोगों को काम के लिए दफ्तरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी: अमन अरोरा
चंडीगढ़, 1 सितंबर:
पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पंजाब के सुशासन और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अमन अरोरा ने आज ‘ Digi.Punjab.gov.in ‘ पोर्टल का शुभारंभ किया। यह एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल है जहां 12 विभागों की 300 से अधिक सरकारी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, जिससे विभिन्न पोर्टलों पर जाने, फाइलों को हाथ से भरने और सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं रह जाती है।
महात्मा गांधी राज्य लोक प्रशासन संस्थान (मैगसिपा) में पोर्टल का शुभारंभ करते हुए श्री अमन अरोरा ने कहा कि पहले चरण के तहत, नागरिक अब विभिन्न विभागों से संबंधित 300 से अधिक आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं का आसानी से लाभ उठा सकते हैं। मुख्य सेवाओं में स्वास्थ्य विभाग से संबंधित दस्तावेज जैसे जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, चिकित्सा फिटनेस प्रमाण पत्र, गृह मामलों से संबंधित सेवाएं जैसे हथियार लाइसेंस जारी करना और नवीनीकरण, विवाह पंजीकरण आदि शामिल हैं। इसके अलावा, नागरिक श्रम कल्याण योजनाओं, स्थानीय निकाय संपत्तियों के हस्तांतरण, चिकित्सा शिक्षा पंजीकरण, पुलिस सत्यापन सेवाओं (जैसे किरायेदार और कर्मचारी सत्यापन), राजस्व विभाग के प्रमाण पत्र (जैसे आय, निवास और पिछड़ा क्षेत्र प्रमाण पत्र), सामाजिक न्याय विभाग के जाति प्रमाण पत्र, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और जल कनेक्शन की मंजूरी जैसी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। अगले दो महीनों में इस पोर्टल पर 800 से अधिक सरकारी सेवाएं उपलब्ध हो जाएंगी और प्रत्येक आवेदन के लिए एक समय सीमा निर्धारित की गई है।
श्री अमन अरोरा ने कहा, “ऊपर से नीचे तक हर अधिकारी के लिए स्पष्ट समय सीमा निर्धारित कर दी गई है। किसी भी देरी का असर उनके रिकॉर्ड पर पड़ेगा।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भ्रष्टाचार वहीं पनपता है जहां जवाबदेही और पारदर्शिता नहीं होती और यह व्यवस्था इन दोनों पर अंकुश लगाएगी।
सुशासन और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सुशासन का अर्थ है कि आम आदमी को बिना किसी परेशानी या रिश्वतखोरी के सेवाएं मिलें। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार इस सिद्धांत के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नया पोर्टल सेवाओं के पूर्ण डिजिटलीकरण, वास्तविक समय में ट्रैकिंग और एक मजबूत जवाबदेही तंत्र सुनिश्चित करता है, जिससे लालफीताशाही की बाधाएं दूर होती हैं और भ्रष्टाचार पर रोक लगती है।
श्री अमन अरोरा ने कहा, “मुझे याद है, कुछ समय पहले जब मैं लोगों के बीच बैठता था, तो मुझे बार-बार वही शिकायतें सुनने को मिलती थीं—’सर, मुझे नहीं पता फाइल कहां अटकी है’, ‘मैं तीसरी बार चक्कर लगा रहा हूं’। आज मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हम उन शिकायतों का जवाब झूठे वादों से नहीं, बल्कि एक पोर्टल के माध्यम से दे रहे हैं।”
श्री अमन अरोरा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि “डिजी पंजाब” सिर्फ़ एक आईटी परियोजना नहीं है, बल्कि यह मुख्यमंत्री मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के उस संकल्प को दर्शाती है जिसमें फ़ाइलों से ज़्यादा नागरिकों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा, “अब दिहाड़ी मजदूर को प्रमाण पत्र पाने के लिए अपनी दिहाड़ी कमाई को बर्बाद करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। सीमावर्ती गाँव के छात्र को भी वही सुविधाएँ मिलेंगी जो चंडीगढ़ में बैठे किसी व्यक्ति को मिलती हैं।” उन्होंने कहा कि अब हर आवेदन पर नज़र रखी जाएगी, समय सीमा तय की जाएगी और संबंधित कर्मचारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा, और कोई भी फ़ाइल यूँ ही ‘लापता’ नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जहाँ तकनीक नहीं पहुँच सकती, वहाँ हमारा सेवा केंद्र और घर-घर जाकर सेवा देने वाली सेवा 1076 एक सेतु का काम करती रहेगी।
मंत्रिमंडल मंत्री ने कहा कि पहले की अव्यवस्थित व्यवस्था, जिसमें नागरिकों को विभिन्न पोर्टलों से गुजरना पड़ता था, लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था और विभिन्न प्रणालियों और कागजी कार्रवाई के लिए एजेंटों पर निर्भर रहना पड़ता था, इस नए शासन मॉडल से पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि यह नागरिकों के लिए मोबाइल-अनुकूल इंटरफेस और वास्तविक समय ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है, जिससे प्रक्रिया में बिचौलियों और भ्रष्टाचार का प्रभावी ढंग से खात्मा होता है। इसी तरह, अधिकारियों के लिए, यह कार्यालय के कामकाज को सुव्यवस्थित करता है, फाइलों का बोझ कम करता है और उन्हें बार-बार कागजी कार्रवाई करने के बजाय जनता की सेवा पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाता है।
इस पहल की मजबूत तैयारियों पर प्रकाश डालते हुए श्री अरोरा ने कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य ने ‘मवान-ध्यान सत्कार योजना’ का डिजिटलीकरण किया है, जिसके तहत 76 लाख से अधिक लाभार्थियों को लाभ पहुंचाया गया है और एसएमएस तथा व्हाट्सएप के माध्यम से 2 करोड़ से अधिक क्यूआर कोड वाले प्रमाण पत्र वितरित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि 45,000 से अधिक पटवारियों, सरपंचों और पार्षदों ने अपने मोबाइल फोन से सीधे एक करोड़ से अधिक आवेदनों की प्रक्रिया पूरी की है।
उन्होंने कहा, “बेहतर शासन व्यवस्था मेरा मिशन है। यह सिर्फ तकनीक के बारे में नहीं है, बल्कि सरकार प्रणाली में लोगों का विश्वास बहाल करने के बारे में है और हम उन्हें यही दे रहे हैं।” इसके साथ ही उन्होंने पंजाब के लोगों से इस पोर्टल का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।
अधिकारियों को संदेश देते हुए श्री अमन अरोरा ने कहा, “मैं यहां उपस्थित प्रत्येक अधिकारी को यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यह पोर्टल तभी सफल होगा जब आप इसे सफल बनाएंगे। इसलिए अपने कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दें, नागरिकों की सहायता करें और इस पोर्टल पर प्राप्त प्रत्येक आवेदन को अपने परिवार का आवेदन समझें।”
इस पोर्टल के शुभारंभ समारोह में पंजाब पारदर्शिता एवं जवाबदेही आयोग के मुख्य आयुक्त श्री वी.के. जनजुआ, शासन एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री डी.के. तिवारी, निदेशक श्री स्पेशल सारंगल और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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