देश की 6 सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान शुरू, पुडुचेरी से असम और तमिलनाडु तक कड़ी सुरक्षा
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर। देश के चार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में छह सीटों पर उपचुनाव के लिए मंगलवार सुबह 7 बजे मतदान शुरू हो गया। इनमें पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटें, तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटें, पुडुचेरी की थट्टनचावडी विधानसभा सीट तथा असम की नगांव लोकसभा सीट शामिल हैं। सभी सीटों पर मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।
पुडुचेरी की थट्टनचावडी सीट
पुडुचेरी की थट्टनचावडी विधानसभा सीट पर 11 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदान के लिए 31 बूथ बनाए गए हैं और 26,921 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। सीट मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। उन्होंने अप्रैल में थट्टनचावडी और मंगलम दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी, लेकिन बाद में मंगलम सीट बरकरार रखी। यहां AINRC के अशोक आनंद, कांग्रेस के ई. विनायगम, DMK के के. सेतुसैल्वम और CPI के ए. मोहम्मद सलीम प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल हैं।
असम की नगांव लोकसभा सीट
नगांव लोकसभा उपचुनाव में भाजपा, कांग्रेस और AIUDF के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। भाजपा ने पूर्व IAS अधिकारी देवाशीष शर्मा, कांग्रेस ने पूर्व विधायक सिबामोनी बोरा और AIUDF ने पार्टी प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को मैदान में उतारा है। कुल 15 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। निर्वाचन क्षेत्र में करीब 19.02 लाख मतदाता और 2,112 मतदान केंद्र हैं। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक होगा।
यह उपचुनाव कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद कराया जा रहा है। बोरदोलोई बाद में भाजपा में शामिल हुए और असम विधानसभा चुनाव में दिसपुर सीट से जीत दर्ज की।
तमिलनाडु की दो आरक्षित सीटों पर मतदान
तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर भी सुबह 7 बजे मतदान शुरू हुआ। दोनों सीटें पूर्व AIADMK विधायकों के इस्तीफे और TVK में शामिल होने के बाद खाली हुई थीं। मदुरांतकम में 27 और धारापुरम में 22 उम्मीदवार मैदान में हैं। प्रमुख मुकाबले में TVK, DMK और AIADMK सहित अन्य दल शामिल हैं।
मतदान से पहले दोनों विधानसभा क्षेत्रों में मॉक पोल कराया गया। राजनीतिक दलों के एजेंटों की मौजूदगी में EVM की कार्यप्रणाली की जांच की गई। सुरक्षा के लिए तमिलनाडु पुलिस के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती की गई है।
इन उपचुनावों को विभिन्न दलों के लिए संगठनात्मक ताकत और मौजूदा राजनीतिक समर्थन को परखने के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, चुनाव परिणामों का संसद में मौजूदा सत्ता संतुलन पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।


