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पंजाब में 90 हजार से अधिक नशा पीड़ितों को मिला उपचार और पुनर्वास, ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के सकारात्मक परिणाम

पंजाब में 90 हजार से अधिक नशा पीड़ितों को मिला उपचार और पुनर्वास, ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के सकारात्मक परिणाम

चंडीगढ़, 13 जून 2026: पंजाब सरकार की ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ मुहिम के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। राज्य सरकार का कहना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल तस्करों और अवैध नेटवर्क पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य प्रभावित लोगों को उपचार, पुनर्वास और सामान्य जीवन की मुख्यधारा में वापस लाना भी है।

1 मार्च 2025 को शुरू की गई ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ मुहिम राज्य की सबसे महत्वपूर्ण नशा-विरोधी पहलों में शामिल हो चुकी है। इस अभियान के तहत नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ नशामुक्ति, पुनर्वास और जन-जागरूकता कार्यक्रमों को भी समान महत्व दिया जा रहा है।

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि 1 मार्च 2025 से मई 2026 तक राज्य के विभिन्न नशामुक्ति केंद्रों और ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओओएटी) केंद्रों में 90,000 से अधिक नशा प्रभावित व्यक्तियों का उपचार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकार नशे की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था के मुद्दे के रूप में नहीं देख रही, बल्कि इसे सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौती मानकर कार्य कर रही है।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि नशे की लत की शुरुआती पहचान में शिक्षकों, अभिभावकों और समाज की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि व्यवहार में अचानक बदलाव, चिड़चिड़ापन, पढ़ाई या काम में रुचि कम होना, परिवार से दूरी बनाना, बार-बार पैसों की मांग करना और अत्यधिक गोपनीयता जैसे संकेत नशे की लत की ओर इशारा कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वच्छता की अनदेखी, लगातार थकान, आंखों का लाल होना, नींद की समस्या और वजन में अचानक बदलाव जैसे शारीरिक लक्षणों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। अभिभावकों को बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।

अभियान के तहत उपचार प्राप्त कर चुके कई लोगों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सरकारी नशामुक्ति केंद्रों की मदद से वे सामान्य जीवन में लौट पाए हैं। उपचार और काउंसलिंग ने उन्हें नई शुरुआत करने का अवसर दिया है।

सरकार का मानना है कि नशामुक्ति, पुनर्वास और काउंसलिंग नशे की समस्या से निपटने के तीन प्रमुख स्तंभ हैं। ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के माध्यम से राज्य सरकार नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर रोक लगाने, लोगों में जागरूकता बढ़ाने और प्रभावित व्यक्तियों की सफल रिकवरी सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ स्थायी जीत तभी संभव है जब परिवार, शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और समाज मिलकर इस लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाएं। रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के संयुक्त प्रयासों से ही पंजाब को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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