टैक्स की दरें बढ़ाकर नहीं बल्कि टैक्स का आधार बढ़ाकर मजबूत करेंगे हरियाणा की राजस्व व्यवस्था: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने ‘हरियाणा की अपनी कर-राजस्व व्यवस्था’ के विश्लेषण व मजबूती के लिए आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया
वर्ष 2030 तक राज्य के अपने कर-राजस्व को जीएसडीपी के 10 प्रतिशत और 2047 तक 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य
अप्रैल से अगस्त 2026 तक एसजीएसटी संग्रह 29 प्रतिशत बढ़कर 24,662 करोड़ रुपये हुआ
चंडीगढ़, 30 सितंबर–हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा की अपनी राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य करों की दर बढ़ाकर नहीं, बल्कि कर आधार का विस्तार, बेहतर अनुपालन, राजस्व हानि पर रोक और आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग के माध्यम से हासिल किया जाएगा। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि ईमानदार करदाता पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना राज्य की वित्तीय क्षमता को बढ़ाया जाए।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी बुधवार को विकसित हरियाणा 2047 के लिए ‘हरियाणा की अपनी कर-राजस्व व्यवस्था’ के विश्लेषण व मजबूती के लिए आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट (एसजेएचआईएफएम) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अरुण गुप्ता, आबकारी एवं कराधान विभाग की आयुक्त एवं सचिव श्रीमती आशिमा बराड़, एसजेएचआईएफएम के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू तथा सलाहकार श्री एनके बिश्नोई सहित नीति-निर्माता, कर प्रशासक, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि मजबूत राजस्व व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य केवल अधिक राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि उससे बेहतर सड़कें, स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध करवाकर आमजन के जीवन में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि करदाता को नियमों और प्रक्रियाओं की स्पष्ट जानकारी मिले तथा कर अनुपालन उसके लिए सरल और पारदर्शी हो, यह सरकार की प्राथमिकता है।
एसजीएसटी संग्रह में 29 प्रतिशत की वृद्धि:
मुख्यमंत्री ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों, अप्रैल से अगस्त तक, हरियाणा का राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) संग्रह 29 प्रतिशत बढ़कर 24,662 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संग्रह 19,174 करोड़ रुपये था। अगस्त 2026 में भी हरियाणा के एसजीएसटी संग्रह में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय औसत वृद्धि 13 प्रतिशत रही।
उन्होंने कहा कि देश के कुल जीएसटी करदाताओं में हरियाणा की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत से कम है, लेकिन देश के कुल जीएसटी संग्रह में राज्य का योगदान लगभग 7.7 प्रतिशत है। अब आवश्यकता इस वृद्धि को स्थायी राजस्व क्षमता में बदलने की है।
आर्थिक विकास के साथ बढ़ेगा राजस्व आधार:
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था से उद्योग और सेवा क्षेत्र आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से आगे बढ़ा है। गुरुग्राम में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत सेवाओं का विस्तार हो रहा है। गन्नौर में इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट, आईएमटी खरखौदा में वाहन निर्माण निवेश तथा रेवाड़ी, हिसार और अन्य क्षेत्रों में औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स परियोजनाएं राज्य की आर्थिक गतिविधियों को नई गति दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि पानीपत का टेक्सटाइल उद्योग, अंबाला का वैज्ञानिक उपकरण उद्योग, हिसार का स्टील उद्योग, यमुनानगर का प्लाईवुड उद्योग तथा रोहतक का नट-बोल्ट और ऑटो-कंपोनेंट उद्योग जैसे पारंपरिक एमएसएमई क्लस्टर भी राज्य की आर्थिक शक्ति का महत्वपूर्ण आधार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर नया उद्योग, निवेश और उद्यम रोजगार के साथ-साथ नए राजस्व आधार की संभावनाएं भी पैदा करता है।
2030 तक 10 और 2047 तक 15 प्रतिशत का लक्ष्य:
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य की आर्थिक क्षमता की तुलना में हरियाणा का अपना कर-राजस्व अभी जीएसडीपी के 7 प्रतिशत से कम है। इसे वर्ष 2030 तक 10 प्रतिशत और वर्ष 2047 तक 15 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लक्ष्य करों की दरें बढ़ाकर हासिल नहीं किया जाएगा। इसके लिए मौजूदा राजस्व व्यवस्था की दक्षता, कवरेज और उत्पादकता बढ़ाने, कर आधार का विस्तार करने, नियमों के पालन को बढ़ावा देने और राजस्व की हानि रोकने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दर नहीं, आधार बढ़ाना है, बोझ नहीं, अनुपालन बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि जब से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश का कार्यभार संभाला है तब से बाहरी निवेशकों का विश्वास भारत में बढ़ा है। विकसित हरियाणा से ही विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त होगा।
वन टाईम सैटलमेंट की अवधि 30 नवंबर तक बढ़ी:
मुख्यमंत्री ने बताया कि पुराने लंबित कर विवादों के समाधान के लिए ‘हरियाणा एकबारगी व्यवस्थापन स्कीम, 2026’ लागू की गई है। इसका उद्देश्य पुराने मामलों का निपटारा करना और अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करना है। वर्ष 2025 की योजना का लाभ लगभग 1 लाख 15 हजार व्यापारियों ने उठाया था। व्यापारियों की सुविधा के लिए इस वर्ष की योजना की अवधि बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी गई है। उन्होंने कहा कि ‘पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0’ और ‘ऑटो म्यूटेशन सिस्टम’ के माध्यम से पंजीकरण और इंतकाल की प्रक्रियाओं को डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा रहा है।
एआई और डेटा विश्लेषण से आधुनिक बनेगा कर प्रशासन:
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की राजस्व व्यवस्था डेटा आधारित और आधुनिक तकनीक से सक्षम होनी चाहिए। जीएसटी, पंजीकरण, परिवहन, बिजली, शहरी विकास तथा अन्य सरकारी प्रणालियों के आंकड़ों को आपस में जोड़कर आर्थिक गतिविधियों की व्यापक तस्वीर तैयार की जा सकती है। इससे राजस्व की संभावनाओं और कमियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, उन्नत डेटा विश्लेषण और एकीकृत डेटाबेस के माध्यम से जोखिम की पहचान, राजस्व हानि रोकने और नियमों के अनुपालन को बेहतर किया जा सकता है। हालांकि, तकनीक का उद्देश्य केवल निगरानी नहीं होना चाहिए, बल्कि ईमानदार करदाताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करवाना भी होना चाहिए।
करदाता को केंद्र में रखकर बने कार्ययोजना:
मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में विशेषज्ञों से अगले एक-दो वर्षों के तत्काल उपायों, मध्यम अवधि के सुधारों, भविष्य की तकनीक एवं डेटा प्रणालियों और आवश्यक संस्थागत बदलावों पर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पूरी कार्ययोजना के केंद्र में करदाता होना चाहिए। सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल हो, नागरिक का समय बचे, उसकी अनिश्चितता कम हो और उसे बेहतर सुविधा मिले। ईमानदारी से कर देने वाले नागरिक को सम्मान मिले तथा नियमों का पालन नहीं करने वालों के विरुद्ध प्रभावी व्यवस्था हो।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह राष्ट्रीय सम्मेलन केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हरियाणा की राजस्व व्यवस्था को और अधिक मजबूत, आधुनिक, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में ठोस कदमों का आधार बनेगा।
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव ने बताया महत्वपूर्ण पहल:
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव तथा वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अरूण गुप्ता ने कहा कि ‘विकसित भारत-विकसित हरियाणा’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए राज्य के संसाधनों को सुदृढ़ एवं विस्तारित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य को संसाधन मुख्यतः भारत सरकार से अनुदान एवं सहयोग, ऋण तथा अपने स्वयं के राजस्व के माध्यम से प्राप्त होते हैं। ऐसे में यह सम्मेलन राज्य के स्वयं के राजस्व को बढ़ाने, राजस्व संग्रहण की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने तथा नीतिगत स्तर पर आवश्यक बदलाव कर राजस्व व्यवस्था में मौजूद संभावित कमियों को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में प्राप्त विशेषज्ञ मार्गदर्शन एवं सुझावों को नीतिगत स्तर पर आगे बढ़ाते हुए राज्य के राजस्व संसाधनों को मजबूत करने और हरियाणा के आर्थिक ढांचे को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने की हरियाणा की आर्थिक क्षमता की सराहना:
भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने हरियाणा की आर्थिक क्षमता को रेखांकित करते हुए कहा कि राज्य के पास वर्ष 2047 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को हासिल करने की क्षमता, आर्थिक गतिशीलता, मजबूत औद्योगिक आधार, उद्यमशीलता की भावना और सुशासन मौजूद है। उन्होंने हरियाणा को भारत के विनिर्माण क्षेत्र के प्रमुख उदाहरणों में से एक बताते हुए कहा कि राज्य विनियमन को सरल बनाने और अनुपालन बोझ कम करने में अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने विश्वास-आधारित एवं जोखिम-आधारित नियमों तथा छोटे एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने बताया कि हरियाणा के अपने कर राजस्व में लगभग आधा हिस्सा राज्य जीएसटी से आता है और इसमें राज्य के भीतर होने वाला कारोबार 51 प्रतिशत तथा आईजीएसटी के माध्यम से आने वाला हिस्सा 49 प्रतिशत है, जिसे उन्होंने स्वस्थ मिश्रण बताया। उनके अनुसार उच्च रोजगार, आय और खपत वृद्धि तथा मजबूत सार्वजनिक वित्त के माध्यम से राज्य अपने कर राजस्व को और बढ़ा सकता है। उन्होंने संपत्ति कर आधार को मजबूत करने के लिए संपत्तियों के वार्षिक मूल्यांकन, जुड़े हुए रिकॉर्ड और कर रियायतों की पारदर्शी जानकारी जैसे उपायों पर भी जोर दिया।
डॉ. राज नेहरू ने सम्मेलन को बताया महत्वपूर्ण कड़ी:
स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू ने कहा कि यह सम्मेलन केंद्र सरकार के 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने, हरियाणा को 1.5 ट्रिलियन की इकॉनोमी बनाने, 50 लाख नए रोजगार पैदा करने और सुशासन के संकल्प को पूरा करने के लिए आवश्यक पहलुओं पर विचार-विमर्श करने और विशेषज्ञों के सुझावों को अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।
क्रमांक-2026
लाडली सामाजिक सुरक्षा योजना में 42758 पात्र परिवारों को दिया जा रहा लाभ
अब तक 82 करोड़ 9 लाख 53 हजार 600 रुपए की जारी की गई राशि
चण्डीगढ, 30 सितम्बर – हरियाणा सरकार द्वारा लाडली सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत प्रदेश में हर माह 42 हजार 758 पात्र परिवारों को 13 करोड़ 68 लाख 25 हजार 600 रुपए की राशि मासिक पेंशन के रूप में दी जा रही है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के जिन अभिभावकों के पास केवल बेटियां हैं और कोई बेटा, जैविक या दत्तक नहीं है, उन्हें लाडली सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत 3200 रुपए की राशि मासिक पेंशन के रूप में प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा चालू वित्त वर्ष के दौरान लगभग 82 करोड़ 9 लाख 53 हजार 600 रुपए से अधिक राशि लाडली सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत प्रदान की जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि वृद्धावस्था भत्ता योजना की तर्ज पर 1 जनवरी 2006 से शुरू की गई इस योजना में केवल बालिका वाले अभिभावकों को ही मासिक भत्ता अथवा पेंशन प्रदान की जाती है। इस योजना की शुरुआत 300 रुपये प्रतिमाह से की गई थी जिसे बढाकर अन्य पेंशन योजनाओं के बराबर कर दिया गया है।
श्री बेदी ने बताया कि इस योजना के तहत नामांकन करने के लिए माता या पिता की आयु 45 वर्ष की होने पर यह लाभ देना शुरू किया जाता है। इस प्रकार अभिभावकों के 45वें जन्मदिन पर इस योजना का लाभ मिलना आरम्भ होता है, जो लगातार 15 साल तक प्रदान किया जाता है। इसके बाद अभिभावकों की आयु 60 वर्ष पूरी होने के बाद उन्हें वृद्धावस्था सम्मान भत्ता योजना में शामिल कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि माता-पिता में से किसी की एक मृत्यु होने पर जीवित माता या पिता को यह भत्ता प्रदान किया जाता है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा लाडली सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत पहले पात्रता आयु 55 वर्ष की गई थी। जिसे घटाकर 45 वर्ष कर दिया गया है और मासिक भत्ता भी वृद्धावस्था सम्मान भत्ता योजना के तहत बढ़ाकर 3200 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।
श्री कृष्ण बेदी ने बताया कि कोई भी परिवार जो एकल अभिभावक हरियाणा राज्य के स्थाई निवासी हैं, और उनका कोई बेटा, जैविक या दत्तक पुत्र नहीं है। केवल बेटी, बेटियां हैं, वे ही लाडली सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ पाने के हकदार हैं। इस योजना के तहत लाभ पाने के लिए परिवार की सभी साधनों से सकल वार्षिक आय 2,00,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
इसके अलावा, इस योजना के तहत परिवार में माता-पिता में से किसी एक की आयु
45 वर्ष होने के बाद की तिथि से ही पात्र परिवार लाभ प्राप्त करने का हकदार होगा। उन्होंने बताया कि अभिभावकों में यदि माता जीवित है, तो लाभ का भुगतान माता तथा माता जीवित नहीं है, तो लाभ का भुगतान पिता को किया जाएगा।
क्रमांक 2026


