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प्रियंका ठाकुर
फार्मेसी अधिकारियों की भर्ती में ढील, हरियाणा कैबिनेट का बड़ा फैसला
चंडीगढ़, 24 मार्च — नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से फार्मेसी अधिकारियों की भर्ती नियमों में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी गई।
कैबिनेट ने हरियाणा स्वास्थ्य विभाग फार्मासिस्ट (ग्रुप-C) सेवा नियम, 1998 में बदलाव करते हुए छह महीने के अनिवार्य प्रशिक्षण की शर्त को हटाने का निर्णय लिया है। पहले यह शर्त लागू होने के कारण पात्र उम्मीदवारों की संख्या सीमित हो जाती थी, जिससे सरकारी अस्पतालों और औषधालयों में पद खाली रह जाते थे।
सरकार का मानना है कि इस निर्णय से योग्य उम्मीदवारों का दायरा बढ़ेगा और भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी, जिससे स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ की कमी दूर की जा सकेगी।
इसके साथ ही, कैबिनेट ने भर्ती अनुपात में भी बड़ा बदलाव किया है। अब फार्मेसी अधिकारियों के पदों पर 95 प्रतिशत भर्ती सीधे की जाएगी, जबकि पदोन्नति का कोटा घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। पहले यह अनुपात 75:25 था।
वेतन संरचना में भी बदलाव करते हुए फार्मेसी अधिकारियों के वेतन स्तर को FPL-6 से बढ़ाकर FPL-6A कर दिया गया है। इसके तहत संशोधित मूल वेतन 39,900 रुपये निर्धारित किया गया है, जिसे वित्त विभाग द्वारा पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है।
सरकार को उम्मीद है कि इन फैसलों से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।


