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दिव्यांगता पेंशन संशोधन पर विवाद: मनीष तिवारी ने सरकार के फैसले को बताया धोखा

By Priyanka Thakur

नई दिल्ली/चंडीगढ़, 31 मार्च 2026:
चंडीगढ़ से सांसद Manish Tewari ने दिव्यांगता पेंशन पर टैक्स छूट में किए गए संशोधन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस फैसले को राष्ट्र की भावनाओं के साथ धोखा करार देते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।

मनीष तिवारी ने कहा कि सरकार ने दिव्यांगता पेंशन पर टैक्स छूट को केवल उन पूर्व सैनिकों तक सीमित कर दिया है, जिन्हें सेवा के दौरान दिव्यांग घोषित कर बाहर किया गया है। उनके अनुसार, यह फैसला उन हजारों सैनिकों के साथ अन्याय है, जो देश की सेवा करने के बाद दिव्यांगता का सामना कर रहे हैं।

इस मुद्दे को संसद में उठाते हुए तिवारी ने लोकसभा में सवाल किया कि 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले वित्त कानून 2026 में इस संशोधन के पीछे क्या तर्क है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या इस फैसले से पहले कोई आंकड़ा-आधारित अध्ययन या प्रभाव विश्लेषण किया गया था।

तिवारी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार ने इस निर्णय के संवैधानिक पहलुओं पर विचार किया है और क्या रक्षा मंत्रालय से इस संबंध में परामर्श लिया गया था। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि इस बदलाव से कितने पूर्व सैनिक प्रभावित होंगे और सरकार को इससे कितना अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है।

सांसद ने प्रभावित सैनिकों के लिए अंतरिम राहत, स्पष्ट पात्रता और शिकायत निवारण तंत्र की भी मांग की। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल आर्थिक नहीं, बल्कि देश के सैनिकों के सम्मान से जुड़ा हुआ है।

वहीं, इस पर जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री Pankaj Chaudhary ने कहा कि 1 अप्रैल 2026 से आयकर कानून 2025 लागू होने के बाद पुराने आयकर कानून 1961 के प्रावधान समाप्त हो जाएंगे। ऐसे में यदि नया प्रावधान नहीं जोड़ा जाता, तो दिव्यांगता पेंशन पर मिलने वाली टैक्स छूट पूरी तरह खत्म हो सकती थी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वित्त कानून 2026 में किया गया संशोधन इस छूट को जारी रखने के लिए ही जोड़ा गया है।

इस मुद्दे पर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है और आने वाले समय में यह बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन सकता है।

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