सतलुज फिल्म पर रवनीत सिंह बिट्टू का बड़ा बयान, बोले- मेरे दादा बेअंत सिंह का इसमें कोई रोल नहीं हो सकता
By Priyanka Thakur
जालंधर, 8 जुलाई 2026। केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म सतलुज को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन के निरीक्षण के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके दादा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की शहादत खालड़ा की गिरफ्तारी से पहले हो चुकी थी। ऐसे में फिल्म में उनके दादा की भूमिका दिखाना तथ्यों के विपरीत है।
रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि कुछ लोग केवल उनके खिलाफ बोलने के लिए मुद्दे तलाशते रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी तरह अपनी राजनीतिक और सामाजिक दुकानदारी चलाई जा रही है। उनका कहना था कि फिल्म सतलुज की चर्चा केवल अभिनेता दलजीत दोसांझ के बड़े नाम के कारण हो रही है।
उन्होंने कहा कि यदि इस फिल्म से दलजीत दोसांझ जुड़े नहीं होते तो शायद इस पर इतनी चर्चा भी नहीं होती। बिट्टू ने आरोप लगाया कि फिल्म को लेकर जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, वह एक प्रकार का प्रोपेगैंडा है। उन्होंने कहा कि फिल्म पंजाबी और हिंदी भाषा को मिलाकर बनाई गई है, लेकिन इसमें उस दौर की वास्तविक परिस्थितियों को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनके दादा बेअंत सिंह पंजाब में अमन और शांति स्थापित करने के लिए कार्य कर रहे थे। उन्होंने बताया कि बेअंत सिंह फरवरी 1992 में पंजाब के मुख्यमंत्री बने थे और 31 अगस्त 1995 को शहीद हो गए। उनके अनुसार, उस समय तक खालड़ा के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं था और न ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था।
बिट्टू ने दावा किया कि खालड़ा लगातार अज्ञात शवों से संबंधित आंकड़े जुटाने का कार्य कर रहे थे और इस दौरान वे विदेशों की यात्रा भी करते रहे। उनके खिलाफ किसी प्रकार का लुकआउट नोटिस भी जारी नहीं किया गया था।
उन्होंने कहा कि उनके दादा की शहादत 31 अगस्त 1995 को हुई, जबकि खालड़ा को 6 सितंबर 1995 को हिरासत में लिया गया। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब बेअंत सिंह उस समय मुख्यमंत्री भी नहीं थे और उनकी शहादत पहले ही हो चुकी थी, तो फिल्म में उनकी भूमिका किस आधार पर दिखाई गई है।


