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कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने पंजाब विधानसभा में ई-20 मिश्रित पेट्रोल से संबंधित प्रस्ताव का समर्थन किया*

*कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने पंजाब विधानसभा में ई-20 मिश्रित पेट्रोल से संबंधित प्रस्ताव का समर्थन किया*

उन्होंने कहा कि पंजाब ई-20 का विरोध नहीं करता, बल्कि इसके चरणबद्ध कार्यान्वयन और उपभोक्ताओं को विकल्प देने का समर्थन करता है।

*डॉ. रवजोत सिंह के अनुसार, अप्रैल 2023 से पहले निर्मित लगभग 30 करोड़ वाहनों में इंजन अनुकूलता संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।*

*सामान्य पेट्रोल (E10) के साथ-साथ E-20 की उपलब्धता सुनिश्चित करने और मिश्रित पेट्रोल की कीमत कम रखने की मांग*

चंडीगढ़, 4 अगस्त:

पंजाब के कारागार, अनिवासी प्रवासी मामलों और संसदीय मामलों के मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने आज पंजाब विधानसभा में ई-20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण) पेट्रोल प्रस्ताव का जोरदार समर्थन करते हुए कहा कि पंजाब सरकार इथेनॉल मिश्रण नीति का विरोध नहीं करती, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने के पक्ष में है, ताकि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हो सके और लोगों को अपनी जरूरतों के अनुसार ईंधन चुनने का विकल्प मिल सके।

प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए डॉ. रवजोत सिंह ने कहा कि भारत सरकार की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के अनुसार, 2030 तक चरणबद्ध तरीके से इथेनॉल मिश्रण को 20 प्रतिशत तक ले जाने की योजना थी। लेकिन इसे समय से पहले लागू करने के निर्णय से देश भर के करोड़ों वाहन मालिकों में गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी नीति को लागू करने से पहले आवश्यक तकनीकी तैयारियां, वाहनों की अनुकूलता और उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त विकल्पों को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के तकनीकी पहलुओं का जिक्र करते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि एथेनॉल की ऊर्जा दक्षता सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम है, जिसके कारण समान प्रदर्शन प्राप्त करने के लिए अधिक ईंधन की खपत होती है। उन्होंने कहा कि एथेनॉल की नमी सोखने की प्रकृति के कारण यह वातावरण से नमी अवशोषित करता है, जिससे लंबे समय तक उपयोग में न आने वाले वाहनों के इंजन, ईंधन टैंक, ईंधन पाइपलाइन और रबर के पुर्जों को नुकसान पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है।

डॉ. रवजोत सिंह ने सदन को बताया कि अप्रैल 2023 से पहले देश में निर्मित लगभग 30 करोड़ वाहन, जिनमें लगभग 22 करोड़ दोपहिया वाहन और 8 करोड़ चार पहिया वाहन शामिल हैं, ई-20 मानकों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इन वाहनों को होने वाले संभावित नुकसान के संबंध में स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए और यदि उपभोक्ताओं को कोई नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।

पर्यावरण संबंधी चिंताओं की ओर ध्यान दिलाते हुए मंत्रिमंडल मंत्री ने कहा कि इथेनॉल उत्पादन में बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है, विशेषकर जब इसका उत्पादन गन्ने, धान और मक्का जैसी फसलों से किया जाता है। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों, कृषि और पर्यावरण पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों का गंभीरता से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मौजूदा नीति से तेल विपणन कंपनियों, इथेनॉल उत्पादकों और सरकार को अधिक लाभ हो सकता है, जबकि आम उपभोक्ताओं को परिचालन लागत में वृद्धि, माइलेज में कमी और वाहन रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ सकता है।

डॉ. रवजोत सिंह ने दोहराया कि पंजाब की मुख्य मांग ई-20 को वापस लेना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को विकल्प उपलब्ध कराना है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ई-20 के साथ-साथ नियमित पेट्रोल (ई10) भी उपलब्ध कराया जाए, क्योंकि दुनिया के कई देशों में वाहन की क्षमता के अनुसार विभिन्न प्रकार के इथेनॉल मिश्रित ईंधन उपलब्ध कराए जाते हैं।

मंत्रिमंडल मंत्री ने यह भी मांग की कि ई-20 मिश्रित पेट्रोल की कीमत सामान्य पेट्रोल से कम रखी जानी चाहिए ताकि इसकी अपेक्षाकृत कम ऊर्जा दक्षता के कारण उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े।

अपने संबोधन के अंत में डॉ. रवजोत सिंह ने कहा कि पंजाब विधानसभा द्वारा पारित इस प्रस्ताव को व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार को भेजा जाना चाहिए, ताकि ई-20 नीति की व्यापक समीक्षा की जा सके। उन्होंने सदन में इस महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाने के लिए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को धन्यवाद दिया और कहा कि यह मुद्दा करोड़ों वाहन मालिकों और देश के प्रत्येक आम नागरिक से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।

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