GST में बड़ा बदलाव संभव, टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति खत्म करने और 5 करोड़ की सीमा बढ़ाने पर विचार
नई दिल्ली, 5 अक्टूबर: जीएसटी व्यवस्था में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जीएसटी परिषद की 7 अक्टूबर को होने वाली बैठक में कारोबारियों के खिलाफ कर चोरी के मामलों में गिरफ्तारी और आपराधिक कार्रवाई से जुड़े नियमों में बदलाव के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। प्रस्ताव के तहत टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति को सीमित करने और किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले अदालत की मंजूरी अनिवार्य करने की बात कही गई है।
मौजूदा व्यवस्था के तहत केंद्रीय जीएसटी कानून की धारा 69 में निर्धारित शर्तों के आधार पर आयुक्त किसी अधिकारी को गिरफ्तारी की अनुमति दे सकता है। प्रस्तावित बदलाव के बाद यह अधिकार कर अधिकारियों से वापस लिया जा सकता है और गिरफ्तारी के लिए न्यायालय की अनुमति जरूरी हो सकती है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अंतिम फैसला जीएसटी परिषद की बैठक में ही होगा।
आपराधिक कार्रवाई की सीमा एक करोड़ से बढ़कर 5 करोड़ रुपये हो सकती है
जीएसटी से जुड़े गंभीर अपराधों में आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा को भी बढ़ाने का प्रस्ताव है। वर्तमान में एक करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट या गलत रिफंड जैसे मामलों में आपराधिक कार्रवाई और गिरफ्तारी का प्रावधान है।
प्रस्ताव के अनुसार, आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये की जा सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं होगा कि पांच करोड़ रुपये तक की कर चोरी को माफ कर दिया जाएगा।
ऐसे मामलों में सरकार बकाया टैक्स की वसूली के साथ-साथ ब्याज और जुर्माना भी लगा सकती है। यानी प्रस्तावित बदलाव का मुख्य असर आपराधिक कार्रवाई और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर पड़ेगा, न कि सरकार के टैक्स वसूलने के अधिकार पर।
गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में जारी रह सकती है कार्रवाई
प्रस्तावित व्यवस्था में गंभीर धोखाधड़ी और बड़े वित्तीय अपराधों के मामलों में न्यायालय के माध्यम से आपराधिक कार्रवाई जारी रखने का रास्ता खुला रह सकता है। सरकार का जोर अब हर मामले में गिरफ्तारी की बजाय टैक्स की वसूली, ब्याज और जुर्माने के जरिए कार्रवाई करने पर बताया जा रहा है।
यदि जीएसटी परिषद इन प्रस्तावों को मंजूरी देती है, तो जीएसटी कानून के तहत कारोबारियों के खिलाफ जांच, गिरफ्तारी और आपराधिक कार्रवाई की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, प्रस्तावों की अंतिम स्थिति परिषद के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।
News written by Priyanka Thakur


