SIR के दौरान पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं का मुद्दा उठा
चंडीगढ़, 29 सितंबर: पंजाब में Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं से जुड़े मुद्दे को लेकर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष और लुधियाना सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। वडिंग ने गृह मंत्रालय से इस मामले में हस्तक्षेप करने और भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए स्वीकार्य दस्तावेजों को लेकर स्पष्टता देने की मांग की है।
वडिंग के अनुसार पंजाब के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके कुछ युवक-युवतियों ने Form 6 के माध्यम से मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन किया। उनका दावा है कि कुछ आवेदकों से उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पुरानी मतदाता सूची में दर्ज होने का प्रमाण मांगा गया।
पत्र में वडिंग ने नागरिकता अधिनियम, 1955 का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकता से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार की भूमिका है। उन्होंने गृह मंत्रालय से यह स्पष्ट करने की मांग की कि भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज सरकारी संस्थाओं और चुनाव प्रक्रिया में स्वीकार किए जाएंगे।
वडिंग ने संविधान के अनुच्छेद 326 का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार मतदाता बनने के लिए नागरिकता, 18 वर्ष की आयु पूरी होना और संबंधित क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास जैसी शर्तें महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने की प्रक्रिया लगातार जारी रह सकती है और SIR के दौरान पात्र पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के आवेदन प्रभावित नहीं होने चाहिए।
वडिंग ने दावा किया कि कुछ युवाओं के आवेदन 12 सितंबर की क्लेम और ऑब्जेक्शन की समयसीमा से पहले ही रोक दिए गए या खारिज कर दिए गए। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसे आवेदकों के नाम अगली मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाएंगे, जिसका इस्तेमाल पंजाब के 2027 विधानसभा चुनाव में किया जाएगा।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जिन योग्य आवेदकों के पास जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड या अन्य मान्य दस्तावेज हैं, उनके मामलों में स्पष्ट प्रक्रिया होनी चाहिए। उन्होंने गृह मंत्रालय से नागरिकता के प्रमाण के तौर पर स्वीकार किए जाने वाले दस्तावेजों की सूची जारी करने की मांग की।
वडिंग ने यह भी मांग की कि Form 6 के पात्र आवेदनों को लगातार अपडेट की प्रक्रिया के तहत स्वीकार किया जाए और दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से संबंधित घोषणा की अनिवार्यता पर स्थिति स्पष्ट की जाए। मामले को लेकर अंतिम प्रक्रिया और पात्रता संबंधी निर्णय संबंधित चुनावी अधिकारियों के नियमों और दस्तावेजों के आधार पर होगा।


