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हरपाल सिंह चीमा का केंद्र सरकार पर हमला, बोले- भाजपा राज में देश की अर्थव्यवस्था कमजोर हुई | 24 Ghante News

हरपाल सिंह चीमा का भाजपा पर हमला, बोले- 12 साल में देश की अर्थव्यवस्था कमजोर हुई

By Priyanka Thakur

चंडीगढ़, 27 मई:
पंजाब के वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema ने केंद्र की Bharatiya Janata Party सरकार पर देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के 12 वर्षों के शासन में भारत आर्थिक मंदी, महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ते कर्ज की स्थिति की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने देश को “विश्वगुरु” बनाने का वादा किया था, लेकिन आज कई आर्थिक संकेतकों में भारत छोटे देशों से भी पीछे रह गया है।

एक बयान जारी करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि ताइवान जैसा छोटा देश भी अब कई आर्थिक मानकों में भारत से आगे निकल चुका है। उन्होंने कहा कि केवल 2.5 करोड़ की आबादी वाला ताइवान मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में भारत से आगे निकल गया है, जबकि भारत की आबादी 140 करोड़ से अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत, जो कभी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता था, अब छठे स्थान पर पहुंच गया है।

चीमा ने कहा कि भाजपा सरकार लगातार आर्थिक मुद्दों पर जवाबदेही से बच रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi से सवाल किया कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि आम नागरिक महंगाई, बेरोजगारी और तेल की बढ़ती कीमतों के बोझ तले दबा हुआ है।

पंजाब के वित्त मंत्री ने Reserve Bank of India के हालिया फैसलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आरबीआई द्वारा केंद्र सरकार को रिकॉर्ड डिविडेंड ट्रांसफर करने से पहले अपने कंटिंजेंट रिस्क बफर को 7.5 प्रतिशत से घटाकर 6.5 प्रतिशत करना चिंताजनक है। चीमा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपने बजट को संभालने के लिए देश की वित्तीय संस्थाओं की स्थिरता से समझौता कर रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस केवल बजट संतुलित करने तक सीमित रह गया है, चाहे इसके लिए तेल की कीमतें बढ़ानी पड़ें, महंगाई बढ़े या आरबीआई की वित्तीय क्षमता कमजोर हो जाए। चीमा ने कहा कि आर्थिक प्रबंधन में भाजपा सरकार की नीतियां असफल साबित हुई हैं और इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि देश को पारदर्शी आर्थिक प्रशासन, रोजगार सृजन, घरेलू मांग को मजबूत करने और निवेशकों का भरोसा वापस लाने वाली नीतियों की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार असली आर्थिक मुद्दों से ध्यान हटाकर केवल राजनीतिक बयानबाजी और प्रचार पर ध्यान दे रही है।

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