सुनाम में 19,886 विद्यार्थियों को मिलेंगे स्कूल बैग, अमन अरोड़ा की पहल
सुनाम/लौंगोवाल, 11 अगस्त: पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने सुनाम हलके में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत हलके के 129 सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 19,886 विद्यार्थियों को स्कूल बैग उपलब्ध करवाए जाएंगे। पहले चरण में 6वीं से 12वीं कक्षा तक की 5,710 छात्राओं को स्कूल बैग वितरित किए गए।
यह कार्यक्रम लौंगोवाल के शहीद भगवान सिंह सरकारी स्मार्ट स्कूल (कन्यां) में आयोजित किया गया। यह पहल अमन अरोड़ा के परिवार द्वारा ‘बाबू भगवान दास अरोड़ा फाउंडेशन’ के माध्यम से की जा रही है। आने वाले दिनों में हलके के बाकी विद्यार्थियों को भी स्कूल बैग उपलब्ध करवाए जाएंगे।
अमन अरोड़ा ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को पढ़ाई से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुविधा देने के साथ-साथ उनमें पढ़ाई के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाना है।
कार्यक्रम के दौरान NEET और JEE जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। हलके के 13 विद्यार्थियों ने NEET/JEE में सफलता प्राप्त की है, जिनमें 8 छात्राएं शामिल हैं। इसके अलावा अपनी कक्षाओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र और पदक देकर सम्मानित किया गया।
अमन अरोड़ा ने कहा कि पंजाब की बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। मेडिकल, नॉन-मेडिकल, डिफेंस और सिविल सर्विसेज सहित विभिन्न क्षेत्रों में छात्राएं अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों को समान अवसर उपलब्ध करवाना समय की जरूरत है।
निजी स्कूलों की फीस वृद्धि के सवाल पर अमन अरोड़ा ने कहा कि पंजाब सरकार ने अभिभावकों को मनमानी फीस वसूली से राहत देने के लिए कानूनी कदम उठाए हैं। नियमों के अनुसार निजी स्कूल पांच प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकते। निर्धारित सीमा से अधिक फीस वसूलने पर कार्रवाई की जाएगी और अतिरिक्त राशि वापस करवाने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य शिक्षा के व्यावसायीकरण को रोकना और अभिभावकों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ कम करना है। साथ ही सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता है।


