चंडीगढ़, 23 मई:
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक से प्राप्त लगभग ₹2.87 लाख करोड़ के असाधारण लाभांश को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस तरह आरबीआई के रिज़र्व फंड का अत्यधिक उपयोग देश की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और सेंट्रल बैंक की संस्थागत मजबूती को प्रभावित कर सकता है।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि आरबीआई द्वारा केंद्र सरकार को ट्रांसफर की गई यह राशि अब तक के सबसे बड़े लाभांश भुगतानों में से एक है। उन्होंने कहा कि जब देश का आम नागरिक महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतों और आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है, तब इस अप्रत्याशित लाभ को केवल केंद्र तक सीमित रखना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि इस राशि को सहकारी संघवाद और वित्तीय निष्पक्षता की भावना के तहत राज्यों के साथ भी साझा किया जाए।
वित्त मंत्री ने कहा कि यदि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन संकटों का असर केंद्र सरकार पर पड़ रहा है, तो राज्य सरकारें भी उन्हीं चुनौतियों से जूझ रही हैं। ऐसे में राज्यों को इस आर्थिक सहायता से बाहर रखना संतुलित संघीय व्यवस्था के खिलाफ है।
आरबीआई की वित्तीय क्षमता को लेकर चिंता जताते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि राजकोषीय घाटा कम करना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह सेंट्रल बैंक की वित्तीय मजबूती की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संकट के समय आरबीआई देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि उसके रिज़र्व फंड को लगातार कम किया जाएगा तो भविष्य में आर्थिक संकटों से निपटने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक हालात और मुद्रा बाजार में अस्थिरता को देखते हुए आरबीआई को मजबूत वित्तीय बफर बनाए रखना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने आरबीआई नेतृत्व से संस्थागत स्वतंत्रता और विश्वसनीयता बनाए रखने की अपील भी की।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “भारत एक कमजोर सेंट्रल बैंक के साथ मजबूत और दीर्घकालिक रूप से स्थिर अर्थव्यवस्था नहीं बना सकता। आरबीआई की स्वायत्तता, मजबूती और विश्वसनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”
News By: Priyanka Thakur


