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पंजाब में खनन पूरी तरह से डिजिटल: बरिंदर कुमार गोयल द्वारा पंजाब खनन प्रबंधन प्रणाली (पीएमएमएस) पोर्टल का शुभारंभ*

पंजाब में खनन पूरी तरह से डिजिटल: बरिंदर कुमार गोयल द्वारा पंजाब खनन प्रबंधन प्रणाली (पीएमएमएस) पोर्टल का शुभारंभ*

*पीएमएमएस पोर्टल पंजाब के खनन क्षेत्र में संपूर्ण ट्रैकिंग, अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और वास्तविक समय की निगरानी सुनिश्चित करेगा।*

*खनन कार्यों को सुव्यवस्थित करने के लिए सरकार ने एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया: बरिंदर कुमार गोयल*

*चंडीगढ़, 3 अगस्त:*

पंजाब में प्रौद्योगिकी आधारित सुशासन और खनन गतिविधियों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, खान और भूविज्ञान राज्य मंत्री श्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज पंजाब भवन में पंजाब खनन प्रबंधन प्रणाली (पीएमएमएस) पोर्टल का शुभारंभ किया।

मंत्रिमंडल मंत्री ने कहा कि यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म संपूर्ण खनन प्रणाली को एक ही प्रणाली के अंतर्गत लाएगा। इसके माध्यम से खानों से खनिजों के निष्कर्षण, परिवहन, अंतरराज्यीय चेक पोस्टों से आवागमन, क्रशर इकाइयों में प्रसंस्करण और उपभोक्ताओं तक आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया की निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने खनन क्षेत्र में अधिक दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों को अपनाया है और निगरानी प्रणाली को मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि राज्य का वार्षिक खनन राजस्व पहले लगभग 250 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 825 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

श्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि पीएमएमएस पोर्टल विभिन्न पुरानी और मैनुअल प्रक्रियाओं को एक केंद्रीकृत डिजिटल प्रणाली से बदल देगा, जो वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करेगी और सभी संबंधित पक्षों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। इससे प्रक्रियाओं में देरी कम होगी, रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार होगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज और अधिक कुशल बनेगी।

खनन मॉड्यूल के कामकाज पर प्रकाश डालते हुए मंत्रिमंडल मंत्री ने कहा कि डिजिटल प्रणाली खनन प्रक्रिया के हर चरण को कवर करेगी। इसकी शुरुआत जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (डीएसआर) पर आधारित वैज्ञानिक योजना तैयार करने से होगी। आवेदन जमा करने से लेकर पर्यावरण मंजूरी प्राप्त करने और काम शुरू करने की अनुमति प्राप्त करने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि किसी भी खदान के संचालन से लेकर उसके बंद होने तक के सभी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे। यह प्रणाली सक्रिय और निष्क्रिय खदानों तथा उपलब्ध खनिज भंडारों की स्वीकृत मात्राओं के बारे में वास्तविक समय की जानकारी भी प्रदान करेगी।

मंत्रिमंडल मंत्री ने कहा कि पीएमएमएस पोर्टल आवेदन, तकनीकी मूल्यांकन और अनुबंध जैसी प्रक्रियाओं तक डिजिटल पहुंच प्रदान करके पारदर्शिता को बढ़ावा देगा। इसके माध्यम से तैयार किया गया डिजिटल रिकॉर्ड जवाबदेही को मजबूत करेगा और आम जनता का विश्वास भी बढ़ाएगा।

उन्होंने कहा कि फास्टैग, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरों और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) तकनीक से लैस स्मार्ट अंतरराज्यीय चेक पोस्ट पड़ोसी राज्यों से पंजाब में प्रवेश करने वाले खनिज परिवहन वाहनों की स्वचालित पहचान और निगरानी सुनिश्चित करेंगे।

उन्होंने कहा कि तकनीकी एकीकरण से न केवल शुल्क का स्वचालित संग्रह और डिजिटल वजन पर्चियों का त्वरित सत्यापन संभव होगा, बल्कि इससे मानवीय हस्तक्षेप भी कम होगा और निगरानी प्रणाली का स्तर भी बेहतर होगा।

मंत्रिमंडल मंत्री ने कहा कि क्रशर इकाइयों को भी इस डिजिटल प्रणाली से जोड़ा गया है। इन इकाइयों में लगाए गए स्मार्ट बिजली मीटर पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) से जुड़े होंगे, जिससे बिजली की खपत के आधार पर उत्पादन का सटीक आकलन किया जा सकेगा। इससे उत्पादन संबंधी फर्जी रिपोर्टों को रोका जा सकेगा और खनिज प्रसंस्करण में अधिक जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

उन्होंने कहा कि क्रशर मालिक लाइव डैशबोर्ड के माध्यम से कच्चे माल के स्टॉक की निगरानी कर सकेंगे, तैयार उत्पादों का रिकॉर्ड रख सकेंगे और मासिक रिटर्न ऑनलाइन दाखिल कर सकेंगे। इससे अनुपालन प्रक्रिया सरल हो जाएगी और सरकार तथा खनन उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।

श्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि पोर्टल से अल्पकालिक परमिट जारी करने की प्रक्रिया भी सरल हो जाएगी। ईंट भट्टों के लिए के-परमिट, सड़क निर्माण के लिए के-1 परमिट और तहखाने की खुदाई के लिए के-2 परमिट के लिए आवेदन ऑनलाइन डैशबोर्ड के माध्यम से किए जा सकेंगे। इससे कागजी कार्रवाई कम होगी और सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि खनन मशीनरी और वाहनों को “वाहन पोर्टल” से जोड़ा जाएगा ताकि केवल अधिकृत और सत्यापित वाहनों को ही खनिज परिवहन की अनुमति दी जा सके और अवैध परिवहन को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

वित्तीय प्रबंधन के संबंध में मंत्री जी ने कहा कि पीएमएमएस पोर्टल को एक सुरक्षित डिजिटल भुगतान गेटवे के माध्यम से एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) से जोड़ा गया है। इसके जरिए रॉयल्टी, शुल्क और जुर्माने की राशि सीधे संबंधित सरकारी खातों में जमा की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि सिंगल विंडो पेमेंट सुविधा, स्वचालित मिलान प्रणाली और लाइव वित्तीय डैशबोर्ड के माध्यम से वित्तीय लेनदेन अधिक सरल, पारदर्शी और त्रुटिरहित होंगे। इससे प्रभावी ऑडिट और निगरानी भी सुनिश्चित होगी।

खनन एवं भूविज्ञान मंत्री ने कहा कि पंजाब खनन प्रबंधन प्रणाली पोर्टल पंजाब में एक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रौद्योगिकी आधारित खनन प्रणाली स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह पोर्टल नियामक निगरानी को मजबूत करेगा, सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करेगा और राज्य के खनिज संसाधनों के सतत एवं वैज्ञानिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने बताया कि एनआईसी द्वारा विकसित एकीकृत पीएमएमएस पोर्टल को दो चरणों में लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज शुरू किए गए पहले चरण में खनन से संबंधित प्रमुख मॉड्यूल शामिल होंगे और इनसे संबंधित सभी नए आवेदनों को नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संसाधित किया जाएगा, जबकि पहले से चल रहे मामलों को पुराने डेटा के एकीकरण के माध्यम से नए पोर्टल पर आसानी से स्थानांतरित कर दिया जाएगा। क्रशर और अंतरराज्यीय मॉड्यूल से संबंधित दूसरा चरण 20 अगस्त को शुरू किया जाएगा, जिससे विभाग के प्रमुख नियामक और सेवा वितरण कार्यों का डिजिटलीकरण पूरा हो जाएगा।

श्री गोयल ने इस एकीकृत पोर्टल को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) और विभाग की टीम को भी धन्यवाद दिया।

इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (खनन) श्रीमती जसप्रीत तलवार, निदेशक (खनन) श्री बी. श्रीनिवासन, मुख्य अभियंता (खनन) एस. हरदीप सिंह मंदिरत्ता, एनआईसी उप महानिदेशक/राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी श्री विवेक वर्मा, वरिष्ठ निदेशक (आईटी) श्री अनिल कुमार डोगरा, संयुक्त निदेशक (आईटी) श्री देवेंद्र कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक (आईटी) श्री लोकेश द्विवेदी और खनन एवं भूविज्ञान विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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