श्रीमद्भागवत कथा में राजा परीक्षित और राधा रानी प्राकट्य उत्सव का हुआ वर्णन
By Priyanka Thakur
चंडीगढ़: Shri Radha Madhav Mandir सेक्टर-34 में 17वें वार्षिक मूर्ति स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं को भक्ति और अध्यात्म का संदेश दिया गया। कथा का आयोजन 31 मई तक मंदिर परिसर में किया जा रहा है, जिसमें आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़ी कथा व्यास साध्वी राधा रानी जी श्रीमद्भागवत कथा का रसपान करवा रही हैं।
कथा के दौरान साध्वी राधा रानी जी ने राजा परीक्षित के जन्म और उनके जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि एक बार शिकार के दौरान राजा परीक्षित जंगल में भटक गए और प्यास से व्याकुल होकर महर्षि शमीक के आश्रम पहुंचे। उस समय महर्षि समाधि में लीन थे और राजा के बार-बार पूछने पर भी उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया।
साध्वी जी ने बताया कि स्वयं को अपमानित महसूस करते हुए राजा परीक्षित ने क्रोध में आकर एक मृत सांप को धनुष की नोक से उठाकर महर्षि शमीक के गले में डाल दिया। जब यह घटना ऋषि पुत्र श्रृंगी को पता चली तो उन्होंने क्रोधित होकर राजा परीक्षित को श्राप दिया कि सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से उनकी मृत्यु होगी।
कथा में आगे बताया गया कि इस श्राप के बाद राजा परीक्षित ने सांसारिक मोह-माया त्याग दी और Shukdev Ji Maharaj से सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा सुनी, जिसके फलस्वरूप उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं को राधा रानी प्राकट्य उत्सव का भी भावपूर्ण वर्णन सुनाया गया। कथा के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए।
कार्यक्रम में मंदिर की समस्त कार्यकारिणी के सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन समिति के अनुसार कथा का उद्देश्य लोगों को अध्यात्म, धर्म और भारतीय संस्कृति से जोड़ना है।


